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काशी : एक शहर, अनेक संस्कृतियां — लघु भारत का जीवंत स्वरूप

काशी : एक शहर, अनेक संस्कृतियां — लघु भारत का जीवंत स्वरूप
Sep 24, 2025, 07:34 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: जिसे दुनिया काशी के नाम से जानती है, सिर्फ गंगा, घाट और मंदिरों तक सीमित नहीं है. यह शहर अपने भीतर पूरे भारत का विविधतापूर्ण रंग समेटे हुए है। यहां का हर घाट, हर मोहल्ला और हर गली अलग-अलग प्रदेशों की झलक दिखाती है. यही कारण है कि काशी को “लघु भारत” भी कहा जाता है. बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, गुजरात और मिथिला जैसे प्रांतों के लोग यहां पीढ़ियों से रहते आ रहे हैं और अपनी-अपनी संस्कृति को सहेजते हुए इसे और भी समृद्ध बना रहे हैं.


काशी में मैथिल समाज की विरासत


मिथिला से आए लोग काशी में सबसे पहले शास्त्र और व्याकरण के अध्ययन के लिए पहुंचे.1910 के आसपास बनैली की मैथिल रानी पद्मावती ने तारा मंदिर संस्था की स्थापना की, जिसने मैथिल समुदाय की शिक्षा और परंपरा को नई दिशा दी. क्वींस कॉलेज (अब उदय प्रताप कॉलेज) में सबसे पहले मैथिल अध्यापक रहे पंडित दीनानाथ मिश्र. इसके बाद महामहोपाध्याय मुरलीधर झा और ज्योतिषाचार्य पंडित जीवनाथ मिश्र नैयायिक जैसे विद्वान यहां अध्यापन से जुड़े. संस्कृत विद्वान गंगानाथ झा ने तो क्वींस कॉलेज में संस्कृत विभाग के प्रिंसिपल से पूरे कॉलेज के प्रिंसिपल तक का सफर तय किया.


MATHALI KALA


मिथिल समाज ने यहां अपनी आस्था और संस्कृति को भी गहराई से रोपा. नीलकंठ, दरभंगा घाट, ब्रह्मनाल, चौक, सामने घाट जैसे क्षेत्रों में आज भी मैथिल परिवार डाला छठ जैसे लोक महापर्व को उसी उल्लास से मनाते हैं, जैसे अपने मूल प्रदेश में. काशी में डाला छठ की परंपरा की शुरुआत का श्रेय भी इन्हीं मैथिल परिवारों को जाता है. छठ घाट पर जब अर्घ्य देने के लिए मैथिल महिलाएं पारंपरिक पाग, माछ, मखान, रसगुल्ला, चूड़ा-दही और तरुआ के साथ पहुंचती हैं तो काशी का परिदृश्य सचमुच मिथिला का रूप ले लेता है.


महान दार्शनिक मंडन मिश्र की स्मृतियां भी काशी से जुड़ी हुई हैं. शंकराचार्य से शास्त्रार्थ में पराजित होने के बाद वे ज्ञानवापी कूप के समीप आकर बस गए और यहीं व्यासपीठ की स्थापना की. आज भी यह स्थान उनकी विद्वता की गवाही देता है.


मराठी परंपरा की गहरी जड़ें


काशी में मराठी समाज की उपस्थिति भी उतनी ही प्राचीन और मजबूत है. पंचद्रावित पुरोहित सभा के साक्ष्य बताते हैं कि महाराष्ट्र के विद्वान यहां बहुत पहले से आकर बस गए थे. पंचगंगा घाट के पास बसने वाले पुरोहित परिवार ‘बनकटे पुराणिक’ के नाम से प्रसिद्ध हुए.


PANCHGANGA GHAT

काशी के दिग्विजयी विद्वानों की परंपरा में महाराष्ट्र से आए पं. शेष, भट्ट, मौनी, वाजपेई, पायगुंडे जैसे विद्वान विशेष रूप से जाने जाते हैं. इनमें नारायण भट्ट का नाम सबसे पहले दर्ज मिलता है, जो काशी आए और यहीं बस गए. संवत 1627-28 में श्रीएकनाथ महाराज भी काशी आए और यहां नाथ भागवत ग्रंथ की रचना की. मराठी संतों और विद्वानों ने काशी के ज्ञान और संस्कृति को नई ऊर्जा दी.


सांस्कृतिक संगम की बेजोड़ मिसाल


काशी का हर कोना किसी न किसी प्रांत की महक से भरा हुआ है.यहां बंगाली पंडितों के घर में दुर्गापूजा की धूम होती है, तो गुजराती परिवारों में गरबा की गूंज सुनाई देती है। तमिल और कन्नड़ समाज अपने मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और उत्सव मनाते हैं. वहीं, मैथिल और मराठी समाज अपने पर्व और परंपराओं से काशी की सांस्कृतिक विरासत को और अधिक रंगीन बनाते हैं.


काशी का यही स्वरूप इसे सिर्फ एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि भारत की विविधता का आईना बनाता है। यही वजह है कि काशी को लघु भारत कहा जाता है, जहां हर भाषा, हर परंपरा और हर संस्कृति गंगा की धारा की तरह एक साथ बहती है

Earthquake: ईरान में भूकंप के तेज झटके महसूस, जिम्मेदार इजरायल-अमेरिका युद्ध
Earthquake: ईरान में भूकंप के तेज झटके महसूस, जिम्मेदार इजरायल-अमेरिका युद्ध
Earthquake in Iran: ईरान में आज मंगलवार को भूकंप के तेज झटके देखने को मिले है. इसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.3 रही है. भूकंप के ये तेज झटके ईरान के अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बीच आया है. जिसका कारण मिसाइल का अटैक माना जा रहा है. ईरान के गेराश प्रांत में यह भूकंप आया है, हालांकि इसमें जानमाल के नुकसान की खबरें अभी तक सामने नहीं आई हैं. ⁠USGS यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, ईरान के गेराश इलाके में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. यह 10 किलोमीटर की गहराई में था. हालांकि ऐसी किसी परमाणु परीक्षण की वजह से हुआ है, इसके कोई संकेत नहीं मिले हैं. अभी तक के संकेतों के अनुसार, ये टेक्टोनिक प्लेट के बीच टकराहट से होने वाली प्राकृतिक घटना लग रही है.विशेषज्ञों का कहना है कि अगर परमाणु बम का परीक्षण किया जाता है तो अलग तरह की तरंगें और सिग्नल आते हैं.चार दिनों से चल रहा ईरान-इजरायल के बीच युद्धआपको बता दें कि, ईरान और इजरायल के बीच युद्ध करीब चार दिनों से चल रहा है. इजरायल और अमेरिकी वायुसेना लगातार ईरान पर मिसाइलें दाग रही हैं. ईरान के कई परमाणु ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. तेहरान, इस्फहान, कौम जैसे शहरों में भी भयंकर बमबारी की गई है. वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स उन मध्य पूर्व देशों को निशाना बना रहा है, जहां अमेरिकी बेस हैं. इसमें इराक, कुवैत, बहरीन, यूएई और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं. ईरान अपनी मिसाइलों और शाहेद ड्रोन से लगातार हमले कर रहा है.गेराश शहर में भूकंप यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे यानि (USGS) ने बताया कि इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध के बीच आज मंगलवार को दक्षिणी ईरान के गेराश शहर में 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया. जिसे लेकर यूएसजीएस ने कहा कि भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर नीचे आया और झटकों से लोगों में घबराहट फैल गई. हालांकि, इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए कुछ लोगों ने अंदाजा लगाया कि क्या ईरान ने न्यूक्लियर टेस्ट किया है. हालांकि, ऐसे दावों का समर्थन करने वाली कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.ये भूकंप 3 मार्च, 2026 को लोकल टाइम के हिसाब से दोपहर 12:24 बजे ईरान के गेराश से 52 किमी. उत्तर-पश्चिम में आया, इसका सेंटर लैटीट्यूड 28.036°N और लॉन्गीट्यूड 53.789°E पर था और भूकंप धरती की सतह से 10 किमी. नीचे आया. सीस्मोलॉजिस्ट बताते हैं कि ईरान के एक्टिव फॉल्ट जोन में इतने बड़े झटके आम हैं और कुदरती भूकंपों से होने वाले सीस्मिक पैटर्न जमीन के नीचे न्यूक्लियर धमाकों से होने वाले पैटर्न से बहुत अलग होते हैं.
होली के दिन बंद रहेंगी शराब की दुकानें, एक दिन पहले उमड़ी शराब ग्राहकों की भीड़
होली के दिन बंद रहेंगी शराब की दुकानें, एक दिन पहले उमड़ी शराब ग्राहकों की भीड़
वाराणसी: होली के दिन चार मार्च को जिले भर की देशी-अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानें बंद रहेंगी. आबकारी विभाग की ओर से बताया गया है कि इसका कडाई से अनुपालन कराया जाएगा. इस बीच होलिका दहन के दिन से ही शहर और ग्रामीण इलाकों में शराब की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिली. दोपहर से ही देसी, विदेशी और बीयर की दुकानों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग गईं. लोग लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए.होली पर्व को लेकर शराब दुकानों पर बढ़ी भीड़वहीं, कई स्थानों पर देर शाम तक खरीदारी का सिलसिला जारी रहा. त्योहार को देखते हुए कई लोगों ने पहले से ही खरीदारी करने का मन बनाया था. जैसे-जैसे शाम नजदीक आई, दुकानों पर भीड़ और बढ़ती गई. स्थिति यह रही कि कई स्थानों पर ग्राहकों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा. कुछ दुकानों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी.ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे. गांवों के आसपास स्थित ठेकों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. कई स्थानों पर लोग सड़क किनारे कतारबद्ध खड़े दिखे. भीड़ अधिक होने के कारण कुछ जगहों पर हल्की नोकझोंक की स्थिति भी बनी, हालांकि पुलिस और आबकारी विभाग की सक्रियता से व्यवस्था सामान्य रही.होली पर्व ने बाजारों में बढ़ाई रौनकगौरतलब है कि होली के मौके पर रंग-गुलाल के साथ-साथ खान-पान और अन्य तैयारियों में भी बाजारों में रौनक बढ़ गई है. वहीं शराब की दुकानों पर उमड़ी भीड़ ने त्योहार की तैयारियों की एक अलग तस्वीर भी पेश की. वहीं शराब पीकर हुडदंग मचाने वालों की खैर नहीं है. इसके लिए भी पुलिस प्रशासन की ओर पुख्‍ता इंतजाम किए गए हैं. शराब के खुफिया ठिकानों पर भी पुलिस छापेमारी कर रही है. कच्‍ची शराब बनाने वालों पर पुलिस की विशेष नजर है.
होली पर एहतियात-वाराणसी में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग अलर्ट, चौबीस घंटे मुस्तैद एंबुलेंस सेवाएं
होली पर एहतियात-वाराणसी में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग अलर्ट, चौबीस घंटे मुस्तैद एंबुलेंस सेवाएं
वाराणसी: होली को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है. किसी भी आकस्मिक परिस्थितियों के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है. सार्वजनिक अवकाश की वजह से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे की जगह केवल दोपहर 12 बजे तक चलेगी. वहीं, इमरजेंसी में मरीजों का बेहतर इलाज हो सके, इसके लिए डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की गई है. इधर, होली के दिन किसी तरह की घटना पर लोगों को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सके, इसके लिए चौराहों पर 108 एंबुलेंस खड़ी रहेगी. प्रभारी सीएमओ डॉ. राजेश प्रसाद ने बताया कि अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर भी डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों की टीम तैनात कर दी गई है.एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी विकास तिवारी का कहना है कि आम लोगों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए सभी एंबुलेंस चालक, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की काउंसिलिंग की गई है। होली वाले दिन प्रमुख चौराहों पर जहां एंबुलेंस मौजूद रहेगी, वहीं फोन आने पर निर्धारित समय के भीतर सेवा का लाभ पहुंचाया जाएगा.होली पर छह घंटे बंद रहेंगे बीएचयू के पांच गेटहोली के दिन बीएचयू के मुख्य द्वार के अलावा बाहर जाने वाले रास्तों पर आवागमन बंद रहेगा. यानी, पांच गेट, सीर, छित्तूपुर, नरिया, केंद्रीय विद्यालय और हैदराबाद गेट, बंद रहेंगे. बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर डॉ. संदीप पोखरिया द्वारा जारी सूचना में बताया गया है कि बुधवार को लंका स्थित मुख्य गेट को छोड़कर परिसर के अन्य सभी गेट सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक बंद रहेंगे.सुबह से शाम तक नाव संचालन बंद होली पर गंगा में इस बार नाव नहीं चलेंगी. चार मार्च की भोर 4 बजे से शाम 4 बजे तक पूरी तरह से संचालन पर प्रतिबंध रहेगा. प्रशासन ने इसके लिए सोमवार को निर्देश जारी किए. होली में घाटों पर भारी भीड़ होती है. होली की हुड़दंगई में कुछ लोग नावों की सवारी करते हैं. लापरवाही के कारण कोई हादसा न हो, इसे देखते हुए प्रशासन ने सख्ती की है. प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर बार की तरह ही इस बार भी होली धूमधाम से मनाई जाएगी.शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पिछली बार की तरह ही इस बार भी 4 मार्च को सुबह 4 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक सभी प्रकार के नावों का संचालन बंद रहेगा. शाम 4 बजे से माहौल शांत होने के बाद नावों का संचालन शुरू होगा. रात 8 बजे तक ही नावें चलेंगी, इसके बाद फिर से संचालन बंद रहेगा.