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नाबालिग लड़की का पॉर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल करने के दोषी को उम्रकैद की सजा...

नाबालिग लड़की का पॉर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल करने के दोषी को उम्रकैद की सजा...
Jul 31, 2026, 03:57 AM
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Posted By Diksha Mishra


प्रदेश सरकार की पहल पर सीबीआई ने की थी जांच


वाराणसी: नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने और उसका पॉर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल करने के मामले में गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय ने लमही,मढ़वां निवासी रवि कुमार पटेल को दोषी करार दिया. अदालत ने उसे आजीवन कारावास व दो लाख 80 हजार रुपया जुर्माने की सजा सुनाई. अभियुक्त द्वारा जुर्माना देने पर अदालत ने इसका 70 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को देने का आदेश दिया है. अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक दीप नारायण व विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने पैरवी की.

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि वर्ष 2019 में 11 वर्षीय एक नाबालिग लड़की घर का कुछ सामान लेने अभियुक्त रवि कुमार पटेल की दूकान पर जब भी जाती थी तो वह अपने मोबाइल पर उसे गंदा (पॉर्न) वीडियो दिखाकर उससे कहता था कि यह सब करने से कुछ नहीं होगा. कुछ दिन बाद जब वह उसके दूकान पर गई तो रवि उसका कपड़ा हटाकर अपने मोबाइल से फोटो और वीडियो बना लिया. बाद में उस लड़की को धमकी देने लगा कि उसके गलत काम करे नहीं तो वह फोटो और वीडियो उसके घरवालों को दिखा देखा. लड़की के डर का फायदा उठाकर रवि ने उसके साथ दुष्कर्म किया. रवि ने तीन साल तक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किया और इसका वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल कर दिया.


नाबालिग लड़की का पॉर्न वीडियो अत्यधिक रुप में वायरल होने पर प्रदेश सरकार ने स्वत: संज्ञान लेते हुए वर्ष 2022 में सीबीआई से इसकी जांच कराने की पहल की. सीबीआई ने 27 जून 2022 को अज्ञात लोगों के खिलाफ नई दिल्ली में मुकदमा दर्ज की और इसकी जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर राबिन कुमार को दी गई. भरोसेमंद स्त्रोतों से सीबीआई ने पीड़िता की पहचान करते हुए इससे जुड़े सभी साक्ष्यों को एकत्रित करने में जुट गई. स्रोत से सीबीआई को जानकारी मिली कि रवि कुमार पटेल बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को एकत्रित करने और उसे अपने मोबाइल व ई-मेल के जरिए दूसरों को भेजने व प्रसारित करने में शामिल है. इसकी पुष्टि होने पर सीबीआई की टीम ने 30 जून 2022 को रवि कुमार पटेल के घर की तलाशी ली. इस दौरान उसके बेडरूम से दो सिम लगा मोबाइल,लैपटॉप,एक पैनकार्ड समेत अन्य सामग्रियों को बरामद की और फोरेंसिंक जांच के लिए उसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दी. दौरान विवेचना सीबीआई ने घटनास्थल का अवलोकन के साथ ही अग्रिम कार्रवाई के लिए 11 जुलाई को पीड़िता को बाल कल्याण समिति और अदालत के समक्ष पेश कराकर उसका बयान दर्ज कराया. इस बीच सीबीआई ने 13 जुलाई 2022 को रवि कुमार पटेल को गिरफ्तार कर लिया. विवेचना पूरी कर छह सितंबर 2022 को अदालत में रवि कुमार पटेल के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दी और 23 मार्च 2023 से इसकी सुनवाई होने लगी. अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता समेत 11 गवाहों को परीक्षित कराया गया. गिरफ्तारी के बाद से ही अभियुक्त जेल में बंद है.


अदालत ने की गंभीर टिप्पणी, जिलाधिकारी को दिए सुझाव


अभियोजन तथा बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के पश्चात् अपने फैसले में कहा कि दोषी रवि कुमार पटेल का यह कृत्य उसकी वासना को तो परिलक्षित करता ही है,साथ ही साथ यह भी परिलक्षित करता है कि उसने बालक पोर्नोग्राफी को बढ़ावा दिया जो कि निश्चित रूप से एक व्यवसायिक मंशा से किया गया होगा. चाइल्ड पोर्नोग्राफी में लिप्त व्यक्ति मानसिक रोगी तो है ही साथ ही साथ ऐसा व्यक्ति समाज के लिए खतरा भी है.


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निश्चित रूप से चाइल्ड पोर्नोग्राफी बच्चों को ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा कर देता है जिससे कि भविष्य में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा तो धूमिल होती ही है,साथ ही साथ उनका मानसिक विकास भी प्रभावित होता है. ऐसे प्रकरणों में न्यायालय का दायित्व है कि जिसने चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज वीडियोज बनाये हों,उसे ऐसे दंड से दंडित करे जिससे कि समाज में एक संदेश तो जाये ही साथ ही साथ वे व्यक्ति भी सतर्क हो जायें जो इन अपराधों में लिप्त हैं एवं जिनका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है. अदालत ने जिलाधिकारी को सुझाव दिया है कि ऐसी कार्ययोजना बनाकर यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को लैंगिक अपराध से बचने के बाबत विद्यालय तथा सामाजिक स्तर पर भी जागरूक किया जाये.

आईआईटी (बीएचयू) के नवप्रवेशी छात्रों को कमांडर वीरेन्द्र जेटली ने दिया राष्ट्रसेवा का संदेश
आईआईटी (बीएचयू) के नवप्रवेशी छात्रों को कमांडर वीरेन्द्र जेटली ने दिया राष्ट्रसेवा का संदेश
वाराणसी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू) के ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम-2026 के तीसरे दिन शनिवार को भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और प्रेरक वक्ता कमांडर वीरेन्द्र कुमार जेटली ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आईआईटी में अर्जित ज्ञान और तकनीकी दक्षता का सर्वोत्तम उपयोग राष्ट्र और समाज के विकास के लिए होना चाहिए।स्वतंत्रता भवन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम-2026 के अध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार मिश्रा ने मुख्य अतिथि का परिचय देकर की। इस अवसर पर कार्यक्रम के सलाहकार प्रो. आर.के. मंडल, छात्र अधिष्ठाता प्रो. राजेश कुमार, एसोसिएट डीन (अकादमिक-यूजी) प्रो. इंद्रजीत सिन्हा, एसोसिएट डीन (अकादमिक-पीजी) प्रो. कौशिक चट्टोपाध्याय तथा एसोसिएट डीन (कोर कोर्स) प्रो. अनुराग ओहरी भी उपस्थित रहे।अपने प्रेरक व्याख्यान में कमांडर जेटली ने बताया कि आईआईटी खड़गपुर से बी.टेक. (ऑनर्स) करने के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना में शामिल होकर देशसेवा का मार्ग चुना। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में भी निहित होती है।ALSO READ : प्रेमचंद जयंती समारोह के दूसरे दिन साहित्यिक प्रतिभा का उत्सव, छात्र-छात्राओं ने दिखाई रचनात्मकता.कमांडर जेटली ने नौसेना में अपने अनुभव साझा करते हुए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व, टीम वर्क और त्वरित निर्णय क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों से कहा कि आईआईटी (बीएचयू) में बिताए जाने वाले वर्षों का उपयोग केवल एक सफल इंजीनियर बनने के लिए नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता बनने के लिए भी करें।उन्होंने अपने व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों के करियर, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण से जुड़े सवालों के जवाब भी दिए। छात्रों ने उनके अनुभवों और विचारों में गहरी रुचि दिखाई।कमांडर वीरेन्द्र कुमार जेटली वर्तमान में आईआईटी खड़गपुर के सलाहकार, आईआईटी भुवनेश्वर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य, एसआरएम विश्वविद्यालय, चेन्नई में यूजीसी नामित सदस्य तथा एसओए विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं। वे यूथ4नेशन के संस्थापक राष्ट्रीय समन्वयक और We Can! We Can!, सफलता की उड़ान तथा 100 Great IITians: Dedicated to the Service of the Nation जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक भी हैं।कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने कमांडर जेटली का आभार व्यक्त किया। संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रेरक व्याख्यान नवप्रवेशी छात्रों में उत्कृष्टता, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रेमचंद जयंती समारोह के दूसरे दिन साहित्यिक प्रतिभा का उत्सव, छात्र-छात्राओं ने दिखाई रचनात्मकता.
प्रेमचंद जयंती समारोह के दूसरे दिन साहित्यिक प्रतिभा का उत्सव, छात्र-छात्राओं ने दिखाई रचनात्मकता.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय अंतर्गत संचालित मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान, लमही द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रेमचंद जयंती समारोह-2026 के दूसरे दिन शनिवार को छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न साहित्यिक एवं सृजनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में शहर के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी साहित्यिक समझ और रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।कार्यक्रम के तहत निबंध लेखन, चित्रांकन और साहित्य प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। निबंध लेखन का विषय "मेरे प्रिय लेखक : प्रेमचंद" रखा गया, जबकि चित्रांकन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित चित्रों के माध्यम से उनके साहित्य और सामाजिक सरोकारों को जीवंत रूप दिया। साहित्य प्रश्नोत्तरी में विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के जीवन, साहित्य और हिंदी भाषा से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया।प्रतियोगिताओं का आयोजन दो वर्गों में किया गया। जूनियर वर्ग में कक्षा 12 तक के छात्र-छात्राओं और सीनियर वर्ग में स्नातक एवं परास्नातक स्तर के विद्यार्थियों ने भाग लिया। दोनों वर्गों में प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए निर्णायकों को प्रभावित किया।ALSO READ : समय पर सीपीआर मिले तो कार्डियक अरेस्ट मरीज की बच सकती है जान, शुरुआती मिनट बेहद अहम: डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी...समारोह के संयोजक डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि प्रतियोगिताओं में स्कूली विद्यार्थियों का उत्साह और साहित्य के प्रति उनकी रुचि विशेष रूप से सराहनीय रही। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रेमचंद के साहित्य और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।समारोह का समापन 2 अगस्त (रविवार) को होगा। अंतिम दिन प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी "दो बैलों की कथा" पर आधारित नाट्य मंचन के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान ने साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और नागरिकों से समापन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
समय पर सीपीआर मिले तो कार्डियक अरेस्ट मरीज की बच सकती है जान, शुरुआती मिनट बेहद अहम: डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी...
समय पर सीपीआर मिले तो कार्डियक अरेस्ट मरीज की बच सकती है जान, शुरुआती मिनट बेहद अहम: डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी...
वाराणसी: कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय पर दिया गया कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह जानकारी देते हुए डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट हो जाए तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में सही तरीके से सीपीआर शुरू करने से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है।उन्होंने बताया कि सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति की हृदय गति 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट के बीच होती है। यदि किसी व्यक्ति की सांस और धड़कन बंद हो जाए तो तुरंत सहायता बुलाने के साथ-साथ सीपीआर शुरू करना चाहिए। लोगों में इसके प्रति जागरूकता का अभाव है, जबकि आज के समय में हर व्यक्ति को इसकी बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।डॉ. द्विवेदी ने कहा कि लोग अक्सर सीपीआर सीखने को महत्व नहीं देते, लेकिन यह एक ऐसा कौशल है जो आपात स्थिति में किसी की जान बचा सकता है। उन्होंने बताया कि स्वयं उनके परिवार में हार्ट अटैक की घटना के बाद उन्हें इसकी उपयोगिता का वास्तविक महत्व समझ में आया।उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर समझना भी जरूरी है। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक प्रभावी रूप से धड़कना बंद कर देता है और व्यक्ति अचेत हो जाता है। ऐसी स्थिति में तत्काल सीपीआर देना अत्यंत आवश्यक होता है।ALSO READ : बरेका ने रचा नया इतिहास, जुलाई में रिकॉर्ड 65 विद्युत रेल इंजनों का किया निर्माण...डॉ. द्विवेदी ने सीपीआर की शुरुआती प्रक्रिया को याद रखने के लिए DRSABC सूत्र बताया। इसमें D (Danger) यानी पहले आसपास के खतरे की जांच करें, R (Response) यानी मरीज की प्रतिक्रिया देखें, S (Shout for Help) यानी सहायता के लिए जोर से आवाज लगाएं, A (Airway) यानी श्वास मार्ग खुला है या नहीं देखें, B (Breathing) यानी लगभग 10 सेकंड तक सांस की जांच करें और यदि सांस नहीं चल रही हो तो C (Compression) यानी सीने पर दबाव देकर सीपीआर शुरू करें।उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सीपीआर का प्रशिक्षण लें और इस जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी अपने परिवार व समाज तक पहुंचाएं, ताकि आपातकालीन स्थिति में अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।