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पथरी के आपरेशन के दौरान मरीज की मौत, लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने किया हंगामा

पथरी के आपरेशन के दौरान मरीज की मौत, लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने किया हंगामा
Nov 17, 2025, 10:55 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - लंका थाना क्षेत्र में संकट मोचन पुरानी गली के पास स्थित डी पल्स हॉस्पिटल में रविवार को पथरी के ऑपरेशन के दौरान एक मरीज की मौत हो गई. इसको लेकर सोमवार की सुबह मरीज के परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया. मृतक मरीज का नाम सत्य प्रकाश राम (40) था. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ऑपरेशन से जुड़े डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. मृतक बसपा के पदाधिकारी रहे हैं और आम आदमी पार्टी से अजगरा से चुनाव भी लड़ चुके हैं. मृतक के पुत्र हिमांशु रंजन और मित्र अनुप कुमार ने बताया कि सत्य प्रकाश राम को गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या थी, जिसके ऑपरेशन के लिए परिवारजन रविवार की सुबह अस्पताल पहुंचे थे.


आपरेशन के समय अचानक बिगड़ी हालत


मरीज के परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन का समय दोपहर 3 बजे तय किया गया था, लेकिन डॉक्टरों के समय पर न पहुंचने के कारण ऑपरेशन शाम 7 बजे शुरू किया गया. परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन के दौरान मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई.


आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में स्थिति खराब होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत परिजनों को सही जानकारी नहीं दी. इसके बजाय अस्पताल की एंबुलेंस बुलाकर मृतक को दूसरे निजी अस्पताल चितईपुर पहुंचा दिया गया, जहां डॉक्टरों ने कुछ देर बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. इससे नाराज परिजन सोमवार सुबह अस्पताल पहुंच गए और वहां काफी देर तक हंगामा किया.


अस्‍पताल में ताला बंद कर डाक्‍टर गायब


परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों ने फोन उठाना बंद कर दिया और अस्पताल पर ताला बंद कर वहाँ से चले गए. परिजनों ने पुलिस से शिकायत करते हुए कहा कि ऑपरेशन से जुड़े डॉक्टर डॉ. शशि प्रकाश, डॉ. ध्रुव सिंह भदौरिया और सर्जन डॉ. एसके यादव की लापरवाही की जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.


हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर इकट्ठा हो गए. तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए लोगों ने पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में लंका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और माहौल को शांत कराया. पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी.

मृतक की करोड़ों की संपत्ति हड़पी, पूर्व वायुसेना अधिकारी के भाई ने दर्ज कराया केस
मृतक की करोड़ों की संपत्ति हड़पी, पूर्व वायुसेना अधिकारी के भाई ने दर्ज कराया केस
वाराणसी : पूर्व वायुसेना अधिकारी के मृत भाई की करीब 40 करोड़ रुपये की संपत्ति धोखे से हड़पने और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है. इस संबंध में सोमवार को मंडुवाडीह थाने में दंपती समेत छह नामजद और छह अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है. लहरतारा निवासी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कमांडर राय अजय कुमार ने पुलिस को बताया कि उनके मंझले भाई राय विमल कुमार अमेरिका में डॉक्टर थे. वर्ष 2017 में वह भारत लौटे और वाराणसी स्थित पैतृक निवास के अलावा एंबी वैली में रहने लगे. आरोप है कि कैलाश दामू मालखेड़े और उनकी पत्नी नीता ने देखभाल करने के बहाने राय विमल कुमार के घर में प्रवेश किया.तहरीर के अनुसार, दंपती ने राय विमल कुमार को शराब में नशीली दवाएं मिलाकर दीं, जिससे उनकी तबीयत खराब हो गई. इसके बाद आरोपियों ने उनके बैंक खातों, डेबिट कार्ड, जमीन के दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन पर कब्जा कर लिया. आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को कोटक महिंद्रा बैंक के खातों में नॉमिनी भी बनवा लिया. राय अजय कुमार ने आरोप लगाया कि राय विमल कुमार के जीवित रहते और उनकी मृत्यु के बाद करीब 40 करोड़ रुपये की राशि आरोपियों ने अपने खातों में स्थानांतरित कर ली.ALSO READ:समीक्षा बैठक : सीपी बोले - साइबर ठगों के केवल प्यादों तक सीमित न रहें, उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जाएतहरीर में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने 28 अगस्त 2025 और 30 मई 2026 को घर में घुसकर धमकी दी और मारपीट की. मंडुवाडीह थाना प्रभारी दिगंबर उपाध्याय ने बताया कि कैलाश दाम मालखेड़े, नीता मालखेड़े, चंद्रमोहन रामस्वरूप बग्गा, सुयश भीमरव सीताफले, सिमरन चंद्र मोहन बग्गा और वैभव देवीदास घुगरे समेत छह अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े आरोपों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है. जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
समीक्षा बैठक : सीपी बोले - साइबर ठगों के केवल प्यादों तक सीमित न रहें, उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जाए
समीक्षा बैठक : सीपी बोले - साइबर ठगों के केवल प्यादों तक सीमित न रहें, उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जाए
वाराणसी : साइबर अपराध के नित-नए तरीकों और आधुनिक ठगी के तौर-तरीकों पर नकेल कसने के लिए वाराणसी कमिश्‍नरेट पुलिस अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है. सोमवार की देर शाम कैम्प कार्यालय में आयोजित साइबर क्राइम समीक्षा गोष्ठी में पुलिस कमिश्‍नर मोहित अग्रवाल ने मातहतों को दो टूक निर्देश देते हुए कहा कि वाराणसी की पुलिसिंग में समयानुकूल बदलाव बेहद जरूरी है. साइबर ठगों के केवल प्यादों तक न सीमित रहकर, उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जाए. प्रत्येक जोन साइबर प्रभारी को 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए. पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी संसाधनों और इंटेलिजेंस को मजबूत करना ही काफी नहीं है, बल्कि शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई और समयबद्ध निस्तारण से ही जनता का विश्वास और मजबूत होगा.पुलिस आयुक्त ने पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध के इकोसिस्टम को तोड़ने के लिए निर्देश दिए. म्यूल एकाउंट खुलवाने और संचालित करने वालों को चिन्हित कर जेल भेजा जाए. अवैध रूप से सिम जारी करने वाली एजेंसियों व डीलरों और फर्जी कॉल सेंटरों पर शिकंजा कसा जाए. एटीएम से पैसे निकालने वाले गिरोहों की पहचान कर वित्तीय फ्रॉड की रकम को तुरंत होल्ड कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए. पुलिस आयुक्त ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली टीमों की सराहना करते हुए कार्रवाई को और परिणामपरक बनाने पर जोर दिया. समीक्षा बैठक में पुलिस उपायुक्त (अपराध) नीतू, पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार पांडेय, अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) नृपेन्द्र समेत सभी जोनों के साइबर प्रभारी और थानों के साइबर नोडल अधिकारी रहे.एक साल में साइबर पर ताबड़तोड़ प्रहारपुलिस आयुक्त ने मोहित अग्रवाल ने बताया कि एक साल में साइबर अपराधियों पर लगातार वार किया गया. संगठित ठगी करने वाले 58 गिरोहों का भंडाफोड़ कर 277 अपराधियों को जेल भेजा गया. 'डिजिटल अरेस्ट' के 5 मामलों में 36 आरोपी गिरफ्तार किए गए. इनसे 1.20 करोड़ नकदी, वाहन और डिजिटल उपकरण बरामद हुए. फर्जी नौकरी, निवेश और विदेशी नागरिकों को ठगने वाले 15 अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश कर 175 आरोपी दबोचे गए. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की लगभग 17 हजार शिकायतों का समाधान, पीड़ितों के 25 करोड़ खाते में होल्ड कराए गए और प्रक्रिया पूरी कर 4.5 करोड़ पीड़ितों को वापस दिलवाए गए. ठगी में उपयोग 10 हजार से अधिक मोबाइल नंबर और 8262 आईएमईआई नंबरों को हमेशा के लिए ब्लॉक कराया गया.संगठित साइबर नेटवर्क चलाने वाले 21 मुख्य आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई. ठगों के झांसे व प्रलोभन में फंसे 550 नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया और 17 चार-पहिया वाहन जब्त किए गए. वहीं, स्कूल-कॉलेजों और चौराहों पर अभियान चलाकर 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के उपाय बताए गए.ALSO READ:मृतक की करोड़ों की संपत्ति हड़पी, पूर्व वायुसेना अधिकारी के भाई ने दर्ज कराया केस
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