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काशी सांसद प्रतियोगिता-2026 की तैयारियां तेज, समन्वय बैठक में तय हुई जिम्मेदारियां...

काशी सांसद प्रतियोगिता-2026 की तैयारियां तेज, समन्वय बैठक में तय हुई जिम्मेदारियां...
Jul 31, 2026, 04:32 AM
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Posted By Diksha Mishra


वाराणसी : काशी सांसद प्रतियोगिता-2026 के सफल आयोजन को लेकर गुरुवार को सर्किट हाउस में समन्वय बैठक आयोजित की गई. बैठक में विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन, तिथियों, प्रशासनिक तैयारियों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को अंतिम रूप दिया गया . साथ ही आयोजन को अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और जनभागीदारी आधारित बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई .


बैठक में भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने कहा कि काशी की प्रतिभाओं को खेल, कला, संस्कृति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस वर्ष प्रतियोगिताओं का दायरा और बढ़ाया गया है . महापौर अशोक तिवारी ने नगर निगम की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया . गुजरात के पूर्व विधायक जगदीश पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने भी आयोजन की तैयारियों और समन्वय पर अपने विचार रखे .


बैठक में बताया गया कि स्केचिंग, पेंटिंग एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि 14 अगस्त है . अब तक हजारों प्रतिभागी पंजीकरण करा चुके हैं .ऑनलाइन चरण 3 से 14 अगस्त तक चलेगा, जबकि चयनित प्रतिभागियों का फाइनल 19 और 20 अगस्त को सिगरा स्टेडियम में होगा .


इसके अलावा अगस्त से दिसंबर तक काशी सांसद ज्ञान प्रतियोगिता (क्विज), सांस्कृतिक महोत्सव, खेलकूद प्रतियोगिता, बाल कवि सम्मेलन, पहली बार आयोजित होने वाली युवा संसद, रोजगार मेला और नई काशी सांसद संस्कृत प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी . संस्कृत प्रतियोगिता में शास्त्रार्थ, आशुभाषण, श्लोक एवं मंत्रोच्चारण तथा गीता, रामचरितमानस और संस्कृत व्याकरण आधारित प्रश्नोत्तरी शामिल होगी .



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बैठक में आयोजन के सफल संचालन के लिए भाजपा महानगर और जिला स्तर पर संयोजकों एवं सह-संयोजकों की घोषणा भी की गई . विभिन्न जोन और ब्लॉकों के लिए अलग-अलग पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई . अंत में आयोजन समिति ने जनप्रतिनिधियों, शिक्षण संस्थानों, कार्यकर्ताओं और काशीवासियों से प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की .

आईआईटी (बीएचयू) के नवप्रवेशी छात्रों को कमांडर वीरेन्द्र जेटली ने दिया राष्ट्रसेवा का संदेश
आईआईटी (बीएचयू) के नवप्रवेशी छात्रों को कमांडर वीरेन्द्र जेटली ने दिया राष्ट्रसेवा का संदेश
वाराणसी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू) के ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम-2026 के तीसरे दिन शनिवार को भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और प्रेरक वक्ता कमांडर वीरेन्द्र कुमार जेटली ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आईआईटी में अर्जित ज्ञान और तकनीकी दक्षता का सर्वोत्तम उपयोग राष्ट्र और समाज के विकास के लिए होना चाहिए।स्वतंत्रता भवन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम-2026 के अध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार मिश्रा ने मुख्य अतिथि का परिचय देकर की। इस अवसर पर कार्यक्रम के सलाहकार प्रो. आर.के. मंडल, छात्र अधिष्ठाता प्रो. राजेश कुमार, एसोसिएट डीन (अकादमिक-यूजी) प्रो. इंद्रजीत सिन्हा, एसोसिएट डीन (अकादमिक-पीजी) प्रो. कौशिक चट्टोपाध्याय तथा एसोसिएट डीन (कोर कोर्स) प्रो. अनुराग ओहरी भी उपस्थित रहे।अपने प्रेरक व्याख्यान में कमांडर जेटली ने बताया कि आईआईटी खड़गपुर से बी.टेक. (ऑनर्स) करने के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना में शामिल होकर देशसेवा का मार्ग चुना। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में भी निहित होती है।ALSO READ : प्रेमचंद जयंती समारोह के दूसरे दिन साहित्यिक प्रतिभा का उत्सव, छात्र-छात्राओं ने दिखाई रचनात्मकता.कमांडर जेटली ने नौसेना में अपने अनुभव साझा करते हुए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व, टीम वर्क और त्वरित निर्णय क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों से कहा कि आईआईटी (बीएचयू) में बिताए जाने वाले वर्षों का उपयोग केवल एक सफल इंजीनियर बनने के लिए नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता बनने के लिए भी करें।उन्होंने अपने व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों के करियर, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण से जुड़े सवालों के जवाब भी दिए। छात्रों ने उनके अनुभवों और विचारों में गहरी रुचि दिखाई।कमांडर वीरेन्द्र कुमार जेटली वर्तमान में आईआईटी खड़गपुर के सलाहकार, आईआईटी भुवनेश्वर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य, एसआरएम विश्वविद्यालय, चेन्नई में यूजीसी नामित सदस्य तथा एसओए विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं। वे यूथ4नेशन के संस्थापक राष्ट्रीय समन्वयक और We Can! We Can!, सफलता की उड़ान तथा 100 Great IITians: Dedicated to the Service of the Nation जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक भी हैं।कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने कमांडर जेटली का आभार व्यक्त किया। संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रेरक व्याख्यान नवप्रवेशी छात्रों में उत्कृष्टता, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रेमचंद जयंती समारोह के दूसरे दिन साहित्यिक प्रतिभा का उत्सव, छात्र-छात्राओं ने दिखाई रचनात्मकता.
प्रेमचंद जयंती समारोह के दूसरे दिन साहित्यिक प्रतिभा का उत्सव, छात्र-छात्राओं ने दिखाई रचनात्मकता.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय अंतर्गत संचालित मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान, लमही द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रेमचंद जयंती समारोह-2026 के दूसरे दिन शनिवार को छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न साहित्यिक एवं सृजनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में शहर के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी साहित्यिक समझ और रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।कार्यक्रम के तहत निबंध लेखन, चित्रांकन और साहित्य प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। निबंध लेखन का विषय "मेरे प्रिय लेखक : प्रेमचंद" रखा गया, जबकि चित्रांकन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित चित्रों के माध्यम से उनके साहित्य और सामाजिक सरोकारों को जीवंत रूप दिया। साहित्य प्रश्नोत्तरी में विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के जीवन, साहित्य और हिंदी भाषा से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया।प्रतियोगिताओं का आयोजन दो वर्गों में किया गया। जूनियर वर्ग में कक्षा 12 तक के छात्र-छात्राओं और सीनियर वर्ग में स्नातक एवं परास्नातक स्तर के विद्यार्थियों ने भाग लिया। दोनों वर्गों में प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए निर्णायकों को प्रभावित किया।ALSO READ : समय पर सीपीआर मिले तो कार्डियक अरेस्ट मरीज की बच सकती है जान, शुरुआती मिनट बेहद अहम: डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी...समारोह के संयोजक डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि प्रतियोगिताओं में स्कूली विद्यार्थियों का उत्साह और साहित्य के प्रति उनकी रुचि विशेष रूप से सराहनीय रही। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रेमचंद के साहित्य और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।समारोह का समापन 2 अगस्त (रविवार) को होगा। अंतिम दिन प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी "दो बैलों की कथा" पर आधारित नाट्य मंचन के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान ने साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और नागरिकों से समापन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
समय पर सीपीआर मिले तो कार्डियक अरेस्ट मरीज की बच सकती है जान, शुरुआती मिनट बेहद अहम: डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी...
समय पर सीपीआर मिले तो कार्डियक अरेस्ट मरीज की बच सकती है जान, शुरुआती मिनट बेहद अहम: डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी...
वाराणसी: कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय पर दिया गया कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह जानकारी देते हुए डॉ. शिव शक्ति द्विवेदी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट हो जाए तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में सही तरीके से सीपीआर शुरू करने से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है।उन्होंने बताया कि सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति की हृदय गति 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट के बीच होती है। यदि किसी व्यक्ति की सांस और धड़कन बंद हो जाए तो तुरंत सहायता बुलाने के साथ-साथ सीपीआर शुरू करना चाहिए। लोगों में इसके प्रति जागरूकता का अभाव है, जबकि आज के समय में हर व्यक्ति को इसकी बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।डॉ. द्विवेदी ने कहा कि लोग अक्सर सीपीआर सीखने को महत्व नहीं देते, लेकिन यह एक ऐसा कौशल है जो आपात स्थिति में किसी की जान बचा सकता है। उन्होंने बताया कि स्वयं उनके परिवार में हार्ट अटैक की घटना के बाद उन्हें इसकी उपयोगिता का वास्तविक महत्व समझ में आया।उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर समझना भी जरूरी है। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक प्रभावी रूप से धड़कना बंद कर देता है और व्यक्ति अचेत हो जाता है। ऐसी स्थिति में तत्काल सीपीआर देना अत्यंत आवश्यक होता है।ALSO READ : बरेका ने रचा नया इतिहास, जुलाई में रिकॉर्ड 65 विद्युत रेल इंजनों का किया निर्माण...डॉ. द्विवेदी ने सीपीआर की शुरुआती प्रक्रिया को याद रखने के लिए DRSABC सूत्र बताया। इसमें D (Danger) यानी पहले आसपास के खतरे की जांच करें, R (Response) यानी मरीज की प्रतिक्रिया देखें, S (Shout for Help) यानी सहायता के लिए जोर से आवाज लगाएं, A (Airway) यानी श्वास मार्ग खुला है या नहीं देखें, B (Breathing) यानी लगभग 10 सेकंड तक सांस की जांच करें और यदि सांस नहीं चल रही हो तो C (Compression) यानी सीने पर दबाव देकर सीपीआर शुरू करें।उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सीपीआर का प्रशिक्षण लें और इस जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी अपने परिवार व समाज तक पहुंचाएं, ताकि आपातकालीन स्थिति में अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।