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हरकतों से बाज नहीं आ रहे ट्रंप, फिर फोड़ा एक और टैरिफ बम...

हरकतों से बाज नहीं आ रहे ट्रंप, फिर फोड़ा एक और टैरिफ बम...
Oct 07, 2025, 09:07 AM
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Posted By Preeti Kumari

Donald Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से टैरिफ को लेकर एक बड़ा बम फोड़ा है. ट्रंप का ये टैरिफ बम मानों खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, इस बार तो उन्होंने हद पार कर दी. जी हां, दिवाली के पटाखों से पहले ही वो टैरिफ बम फोड़ने का काम कर बैठे हैं. अमेरिका फर्स्ट का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने अब नए टैरिफ का ऐलान कर हर किसी के होश उड़ा दिये हैं. बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति ने 1 नवंबर से सभी इम्पोर्टेड ट्रकों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इस घोषणा के पीछे उनका कहना है कि अमेरिका को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए वो टैरिफ लगा रहे हैं.


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ट्रकों पर टैरिफ लगाने को लेकर ट्रंप का कहना है कि, उनके इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा. ट्रंप के इस फैसले का डिलीवरी ट्रक, कचरा ट्रक, ट्रांजिट, शटल, स्कूल बसें और ट्रैक्टर-ट्रेलर, ट्रक समेत कई हेवी-ड्यूटी व्यावसायिक वाहनों के आयातों पर असर पड़ेगा, जिसके चलेत ये सभी 1 नवंबर से महंगे हो जाएंगे. माना जा रहा है कि ट्रंप अमेरिकी प्रोडक्ट्स में इजाफा पाने के लिए आयात पर टैरिफ बढ़ाने का काम कर रहे हैं. ये वहीं ट्रंप है जिन्होंने अमेरिका की सत्ता संभालते ही एक से बढ़कर एक ऐलान करते आ रहे हैं.


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भारत ने ट्रंप की बोलती की बंद


अपने इस टैरिफ बम को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ये दावा कर कहा कि भारत और पाकिस्तान का ही नहीं, बल्कि विश्व के सात देशों के बीच जारी संघर्ष को भी उन्होंने समाप्त कराया है. अपनी हरकतों से बाज ना आने वाले ट्रंप बार-बार सीज फायर का क्रेडिट लेने की फिराक में रहते हैं. जिस पर भारत ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए ट्रंप की बोलती बंद करा दी और ये साफ कर दिया कि, इस मामले में किसी तीसरे मध्यस्थता की कोई भी गुंजाइश नहीं है.


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"मैं बताना चाहता हूं कि मैंने क्या कहा"


इस ढ़कोसले भरे दावे के बीच डोनाल्ड ट्रंप से टैरिफ के बारे में पूछा गया, जिसके जवाब में कड़ा रूख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अगर मेरे पास टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं होता, तो सात में से कम से कम चार युद्ध चल ही रहे होते. इसका नतीजा 'आप भारत और पाकिस्तान को लेकर देखें तो खुद पर खुद समझ आएगा कि वे दोनों देश युद्ध के लिए एक दूजे को ललकार रहे थे, जिसके चलते तबाही का मंजर तक देखने को मिला था. हालांकि, मैं खुलकर नहीं बताना चाहता हूं कि मैंने क्या कहा, लेकिन जो कहा वो बहुत ही प्रभावशाली था.


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इन दो देशों के बीच हुए युद्ध में अगर मैंने सीजफायर का ऐलान नहीं किया होता तो शायद आज पाकिस्तान पूरी तरीके से खत्म हो गया होता. इन बयानों के आगे ट्रंप ने कहा कि ट्रेड धमकी का इस्तेमाल करके पड़ोसी परमाणु शक्ति संपन्न भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने ही शांति समझौता कराया है, ऐसे में ये कहना जरा भी गलत नहीं होगा कि टैरिफ ही इस युद्ध को रुकवाने का एक बड़ा कारण बन सका है. क्योंकि इसी टैरिफ की वजह से ही आज अमेरिका शांति दूत बनकर उभरा है. जिससे वॉशिंगटन को सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई का मुनाफा भी हुआ है.


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आज तक लगाए बैंठे हैं ट्रंप ये रट


आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप का क्रेडिट लेने का रवैया कोई पहली बार नहीं है, बल्कि इसके पहले भी उन्होंने इस तरह का रवैया अपनाया है. इसके लिए उन्हें भारत से मुंहतोड़ जवाब भी मिल चुका है. गौरतलब है कि बीते 10 मई 2025 को जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में रात भर चली लंबी बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, तब से लेकर आज तक वो यहीं रट लगा बैठे है कि उनकी ही देन है कि दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच तनाव थम सा गया है.

पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
वाराणसी: नगर निगम द्वारा पंचकोशी यात्रा की तैयारियों को लेकर व्यवस्थाएं तेज कर दी गई हैं. सोमवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शिवपुर स्थित पांचो पांडव मंदिर, धर्मशाला एवं पंचकोशी यात्रा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लिया.निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. यात्रा मार्ग एवं आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ सुलभ शौचालयों की नियमित सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए.भीषण गर्मी को देखते हुए धर्मशालाओं में ठहरने वाले यात्रियों के लिए कूलर और पंखों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया. नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि कूलरों में नियमित रूप से पानी भरने की व्यवस्था भी बनी रहे, ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके.ALSO READ:राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...रात्रि में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पंचकोशी मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकर लगाने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग करने के आदेश भी संबंधित विभागों को दिए.नगर निगम प्रशासन ने कहा कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा किया जा रहा है.
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. कला, चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला.भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान वायलिन वादक डॉ. एन. राजम् को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. “सिंगिंग वायलिन” के नाम से प्रसिद्ध डॉ. राजम् ने हिंदुस्तानी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लंबे समय तक प्रोफेसर और डीन के रूप में सेवाएं दीं.संक्रामक रोगों विशेषकर काला- अजार के उपचार और अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रो. श्याम सुन्दर को पद्म श्री से सम्मानित किया गया. बीएचयू में उनके नेतृत्व में काला- अजार रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और उनके शोध कार्यों को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा.पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रो. बुद्ध रश्मि मणि को भी पद्म श्री प्रदान किया गया.अयोध्या, सारनाथ और कपिलवस्तु सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर उनके शोध और उत्खनन कार्यों ने भारतीय इतिहास अध्ययन को नई दिशा दी.ALSO READ:धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवालपद्म पुरस्कारों में बीएचयू से जुड़ी हस्तियों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय परिवार और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है. शिक्षा, शोध और संस्कृति के क्षेत्र में बीएचयू की मजबूत परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है.
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
BHU doctor fasts to protest 'distortion' of religious identity, raises questions about faithवाराणसी: धर्म, आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहप्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार ने वाराणसी में उपवास शुरू किया है. सर्किट हाउस के समीप चल रहे इस उपवास के माध्यम से उन्होंने धार्मिक प्रतीकों, नामों और स्वरूपों के कथित “विकृतिकरण” तथा आध्यात्मिक भ्रम फैलाने के खिलाफ जनजागरण की जरूरत बताई.डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में भोजन, आचरण और आध्यात्मिक शुद्धता का विशेष महत्व बताया गया है. उनके अनुसार दूषित विचारों और आचरण का प्रभाव समाज की चेतना पर पड़ता है, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन भी प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि जब धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं में आस्था से इतर विचारधारा का प्रभाव बढ़ता है, तब श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा होती है.उन्होंने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण मंदिर व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों को स्थान मिला, जिनकी धार्मिक आस्था पर सवाल उठते रहे हैं. डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि इससे आम श्रद्धालु स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. उन्होंने धार्मिक और पौराणिक पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म और अधर्म, आदर्श और विरोधी प्रवृत्तियों के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है. उनका कहना है कि यदि इन भेदों को जानबूझकर धुंधला किया जाता है तो समाज की सांस्कृतिक चेतना प्रभावित होती है और नई पीढ़ी भ्रमित हो सकती है.Also Read: नमोघाट हत्‍याकांड पर सामने आया मंत्री रवींद्र जायसवाल का बयान, 5 लाख मुआवजे का एलानतमिलनाडु और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक राजनीति का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाओं और पात्रों की व्याख्या को राजनीतिक या वैचारिक लाभ के लिए बदले जाने के प्रयास हुए हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम को धर्म स्थापना का प्रतीक माना जाता है, जबकि महाभारत के पात्र कर्ण की भूमिका अलग रही है. समाज में कई बार नायक और खलनायक की छवि को मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे सही और गलत की समझ कमजोर होती है. डॉ. सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि उनका उपवास किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है.