BHU की दो नई तकनीकों को मिला उद्योग का साथ, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में होगा बड़ा लाभ...

वाराणसी. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपने शोध और नवाचार को समाज तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को अपनी दो विकसित प्रौद्योगिकियों के व्यावसायिक उपयोग के लिए दो औद्योगिक संस्थानों के साथ लाइसेंस हस्तांतरण संबंधी समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.
एक समझौता मुंबई की एमआरसी एग्रोटेक लिमिटेड के साथ गेहूं की उन्नत किस्म HUW-838 (मालवीय-838) के लाइसेंस हस्तांतरण के लिए हुआ, जबकि दूसरा बेंगलुरु की इंडियन हेल्थ सिस्टम्स (IHS) के साथ आयुर्वेद आधारित अग्निबाला स्व-मूल्यांकन स्वास्थ्य टूल के लिए किया गया. कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए.
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय और उद्योग जगत के बीच इस प्रकार का सहयोग नवाचार को समाज तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि अपनी बौद्धिक संपदा का उपयोग जनकल्याण के लिए सुनिश्चित करना है. उन्होंने उद्योग जगत से रचनात्मक सुझाव देने की भी अपील की ताकि शोध को और अधिक उपयोगी बनाया जा सके.
किसानों के लिए वरदान बनेगी मालवीय-838
कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा विकसित गेहूं की उन्नत किस्म HUW-838 (मालवीय-838) अधिक उत्पादन क्षमता के साथ ब्लास्ट, पीला, भूरा और काला रतुआ, करनाल बंट तथा पाउडरी मिल्ड्यू जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी है. यह सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है. इस किस्म में 11.8 प्रतिशत प्रोटीन तथा जिंक और आयरन की अधिक मात्रा होने के कारण इसे बायोफोर्टिफाइड गेहूं की श्रेणी में भी मान्यता मिली है. इस किस्म को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान समुदाय को समर्पित कर चुके हैं.
कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वी. के. मिश्रा ने कहा कि उद्योग के साथ यह साझेदारी गुणवत्तापूर्ण बीजों के तेजी से उत्पादन और किसानों तक उनकी व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगी.
आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य आकलन को मिलेगा नया मंच
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आयुर्वेद संकाय के क्रियाशरीर विभाग द्वारा विकसित 'अग्निबाला' स्व-मूल्यांकन टूल के जरिए व्यक्ति अपनी पाचन एवं चयापचय क्षमता का स्वयं आकलन कर सकेगा. इंडियन हेल्थ सिस्टम्स इस तकनीक को अपने hPod स्वास्थ्य मूल्यांकन प्लेटफॉर्म से जोड़ेगा, जिससे लोगों को आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य विश्लेषण की सुविधा भी उपलब्ध होगी.
इस टूल का विकास डॉ. अपर्णा सिंह ने प्रो. संगीता गेहलोत और प्रो. किशोर पाटवर्धन के निर्देशन में किया है. इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भी प्रकाशित किया जा चुका है.
बौद्धिक संपदा अधिकार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. बिरंची कुमार सरमा ने कहा कि इन समझौतों से विश्वविद्यालय की तकनीकें किसानों, स्वास्थ्य क्षेत्र और आमजन तक पहुंचेंगी तथा उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को नई मजबूती मिलेगी



