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संध्या बेला में क्यों होता है तुलसी विवाह? क्या है मान्यता ?

संध्या बेला में क्यों होता है तुलसी विवाह? क्या है मान्यता ?
Nov 01, 2025, 07:18 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - हिंदू धर्म में तुलसी माता के रूप में पूज्य हैं, लेकिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी से पूर्णिमा तक तुलसी को पुत्री के रूप में मानकर भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से विवाह कराया जाता है. यह अद्भुत परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी गहरी आस्था से जुड़ी है. विष्णु पुराण और पद्म पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में तुलसी विवाह का विस्तृत उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और इसी के साथ मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है.

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पूजा नहीं बल्कि एक पवित्र व्रत


तुलसी विवाह केवल एक पूजा नहीं बल्कि एक पवित्र व्रत माना गया है. इस व्रत को करने से कन्यादान का फल मिलता है और सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं. शास्त्रों के अनुसार, तुलसी विवाह से वैवाहिक जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और उत्तम संतान की प्राप्ति होती है. विवाहित महिलाओं को यह व्रत अखंड सौभाग्य प्रदान करता है, जबकि कन्याओं को श्रीकृष्ण जैसे आदर्श वर की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है.


तुलसी का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व


तुलसी न केवल पूजा का अनिवार्य अंग है, बल्कि पापों के नाश और वायु शुद्धि का भी प्रतीक है. गले में तुलसी की माला धारण करना धर्मपरायणता का प्रतीक माना जाता है. शास्त्र कहते हैं कि जो व्यक्ति मृत्यु के समय तुलसी धारण करता है, उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है.

विज्ञान भी मानता है कि तुलसी वायु को शुद्ध करती है और वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाती है, इसलिए घर के आंगन या दरवाजे पर तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना गया है.

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तुलसी विवाह के करें ये काम


विवाह की तैयारी करते समय भावना रखें कि आप स्वयं लक्ष्मी और विष्णु का विवाह करा रहे हैं. पूरे परिवार और समाज को शामिल करें ताकि यह परंपरा सामूहिक उत्सव बन सके. विवाह के समय मन को प्रसन्न रखें, जल्दबाज़ी या दिखावे से बचें. पूजा के समापन पर कृतज्ञता के भाव से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रणाम करें.


इसलिए होता है सांध्यकालीन तुलसी विवाह


यह समय गोधूलि बेला (गाय चराकर घर लौटने का समय) अर्थात संध्या काल है. मान्यता है कि प्रबोधिनी एकादशी के दिन श्री विष्णु अपनी योग निद्रा से जागकर सृष्टि के संचालन का कार्य पुनः प्रारंभ करते हैं. तुलसी विवाह काल में वातावरण में विष्णु तत्व और लक्ष्मी तत्व अत्यधिक सक्रिय रहते हैं. इनका एक साथ लाभ उठाने के लिए, संध्या काल में तुलसी विवाह किया जाता है.


गंगा में आस्थावानों ने लगाई डूबकी


भोर से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. श्रृंगार घाट, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट समेत सभी प्रमुख घाटों पर भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई और प्रार्थना की कि उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे. स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, विष्णु मंदिर सहित शहर के अन्य मंदिरों में भक्तों की भोर से ही कतारें लगी रहीं.

घर के गमले में भी उगा सकते है ड्रैगन फ्रूट, जाने तरीका
घर के गमले में भी उगा सकते है ड्रैगन फ्रूट, जाने तरीका
Dragon Gardening Tips : सर्द भरे मौसम में ड्रैगन फ्रूट एक सुपरफूड माना जाता है. क्योंकि यह फल सिर्फ स्वाद में बेहतरीन नहीं होता, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है. कुछ लोगों का मानना है कि, ड्रैगन फ्रूट सिर्फ बड़े खेतों या गर्म इलाकों में ही उगाया जा सकता है, लेकिन सही देखभाल और कुछ खास उपायों से इसे सर्दियों में आप अपने घर के गमले में भी आसानी से उगा सकते है. अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं और अपने घर की बालकनी या छत पर कुछ नया उगाना चाहते हैं, तो ये उपाय आपके लिए बेहद खास हैं.कैक्टस परिवार का पौधा है ड्रैगन फ्रूट बता दें, ड्रैगन फ्रूट कैक्टस परिवार का पौधा है, इसलिए इसके लिए बड़े और मजबूत गमले की जरूरत होती है. कम से कम 12–15 इंच का गमला लें, जिसमें नीचे पानी निकासी के लिए छेद हों. मिट्टी के लिए सामान्य मिट्टी में रेत और वर्मी कंपोस्ट मिलाकर हल्की और अच्छी ड्रेनेज वाली मिट्टी तैयार करें. ड्रैगन फ्रूट को बीज के बजाय कटिंग से उगाना ज्यादा आसान और सफल होता है. 10–12 इंच लंबी हेल्दी कटिंग लें और उसे 2–3 दिन छांव में सुखा लें. इसके बाद कटिंग को गमले की मिट्टी में 2–3 इंच गहराई तक लगाएं और हल्का पानी दें.ड्रैगन फ्रूट उगाने का जाने तरीकाअक्सर सर्दियों में ड्रैगन फ्रूट के पौधे को रोजाना 5–6 घंटे धूप मिलना बहुत जरूरी होता है. गमले को ऐसी जगह रखें जहां सुबह की धूप अच्छी मिले. बहुत ज्यादा ठंडी हवा या पाला पड़ने से पौधे को बचाएं, नहीं तो पौधा बेजान सा हो जाता है, जरूरत हो तो रात में गमले को सुरक्षित जगह पर रख दें. ड्रैगन फ्रूट को ज्यादा पानी पसंद नहीं होता.सर्दियों में हफ्ते में सिर्फ 1–2 बार पानी देना पर्याप्त होता है. ध्यान रखें कि मिट्टी पूरी तरह सूखने के बाद ही पानी दें, वरना जड़ें सड़ सकती हैं. हर 20–25 दिन में थोड़ी सी गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट डालें. साथ ही ड्रैगन फ्रूट बेल की तरह बढ़ता है, इसलिए गमले में लकड़ी या सीमेंट का सहारा जरूर लगाएं, ताकि पौधा अच्छे से ऊपर की ओर बढ़ सकेगा.
एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर बनने जा रही दुल्हन, खास होगा वेलेंटाइन डे
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फिल्म इंडस्ट्री को लेकर अक्सर खबरे आती रहती है, कभी किसी को किसी से प्यार है, लिवइन का साथ और फिर ब्रेकअप, ये कोई नई बात नहीं है. बॉलीवुड में इस तरह का किस्सा हर रोज देखने को मिलता है. लेकिन आज हम बात कर रहे है धनुष और मृणाल ठाकुर की, जिनके अफेयर को लेकर कुछ समय पहले ये दोनों अपने लव अफेयर को लेकर चर्चाओं में छाए हुए थे. पर अब एक बार फिर ये दोनों जोड़ी सुर्खियों में हैं. जी हां, एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर और साउथ स्टार धनुष अब शादी के बंधन में बंधने वाले हैं.मृणाल ठाकुर के लिए खास होगा वेलेंटाइन डेऐसी चर्चाएं हैं कि, धनुष और मृणाल ठाकुर अगले महीने 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के मौके पर शादी के बंधन में बंध सकते हैं. रूमर्स हैं कि यह एक निजी समारोह होगा, जिसमें केवल करीबी परिवार और दोस्तों को ही शामिल किया जाएगा. हालांकि फैंस अभी इस खबर को पुख्ता नहीं मान रहे हैं. क्योंकि इस अफवाहों पर अभी तक न तो मृणाल ठाकुर और न ही धनुष या उनकी टीम की ओर से इन खबरों पर कोई आधिकारिक बयान आया है. इन अफवाहों ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि दोनों सितारे अपनी निजी जिंदगी को हमेशा लाइमलाइट से दूर रखने के लिए जाने जाते हैं. कुछ महीने पहले भी मृणाल और धनुष के रिश्ते को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं.रिश्ते की अटकलों पर जब मृणाल ने तोड़ी चुप्पीअगस्त 2025 में मृणाल ठाकुर ने आखिरकार इन अटकलों पर चुप्पी तोड़ी थी और साफ कहा था कि धनुष उनके ‘सिर्फ अच्छे दोस्त’ हैं. ओनली कॉलीवुड को दिए एक इंटरव्यू में मृणाल ने कहा था कि, उन्हें और धनुष को लेकर उड़ रही खबरें शुरुआत में मजेदार लगी थीं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि धनुष मुंबई में उनकी फिल्म सन ऑफ सरदार 2 की स्क्रीनिंग में खास तौर पर उनके लिए नहीं आए थे.धनुष उस इवेंट में शामिल हुए थे क्योंकि उन्हें अजय देवगन ने आमंत्रित किया था. दरअसल, अफवाहों की शुरुआत उस वक्त हुई जब सन ऑफ सरदार 2 की स्क्रीनिंग का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मृणाल और धनुष को हाथ पकड़ते और एक-दूसरे से कान में कुछ कहते हुए देखा गया. इसके अलावा, मृणाल का धनुष की फिल्म ‘तेरे इश्क में’ की रैप-अप पार्टी में शामिल होना भी चर्चा का विषय बन गया, जबकि वह उस फिल्म का हिस्सा ही नहीं थीं.
बिहार की सियासत के बीच तेजस्वी की बैठक, इन मुद्दों पर हुई चर्चा
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बिहार की राजनीति में कुछ दिनों से तहलका मचा हुआ है. ऐसे में आज शुक्रवार का दिन बिहार की सियासत के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है. जी हां, एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'समृद्धि यात्रा' पर निकल पड़े है, तो दूसरी ओर राजद के लाल नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपने सरकारी आवास पर राजद की कोर कमेटी की एक अहम बैठक बुलाई है. इस मीटिंग के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई जब खरमास खत्म हो गया है.ऐसे में तो इस खरमास के बाद से बिहार में आगे क्या कुछ खेला होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन तेजस्वी यादव फिर से सियासी मैदान में उतर चुके हैं. तेजस्वी के इस बैठक में चुनाव के नतीजों की समीक्षा की गई. साथ ही नए साल में आरजेडी की आगे की रणनीति क्या होगी इसको लेकर भी चर्चा की गई."समीक्षा का दिखावा से ज्यादा जरूरी 'खुद' आत्म-मंथन"हालांकि, इस बीच राजद और लालू परिवार से अलग हो चुकीं रोहिणी ने भी बिना नाम लिए भाई पर कुछ दिनों पहले निशाना साधा था, जिसने राजनीतिक गलियारों में शोर मचाकर रख दिया. ऐसे में तेजस्वी के इस मीटिंग को भी रोहिणी आचार्य ने 'दिखावा' करार दिया है. रोहिणी ने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा- "समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी 'खुद' आत्म-मंथन ' करने और जिम्मेदारी लेने की जरूरत है, 'अपने' इर्द-गिर्द कब्जा जमाए बैठे चिह्नित 'गिद्धों' को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता साबित होगी, ये जो पब्लिक है न, वो सब जानती और समझती है.राहिणी के पोस्ट ने फिर किया सियासी पारा हाई दरअसल, बीते 10 जनवरी को भी लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया के एक पोस्ट के जरिए सियासी पारा हाई कर दिया था. क्योंकि, रोहिणी ने अपने पोस्ट में ये लिखा था कि, बड़ी शिद्दत से बनाई और खड़ी की गई "बड़ी विरासत" को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, "अपने" और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं.हैरानी तो तब होती है , जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर "अपने" ही आमादा हो जाते हैं... जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है.. तब "विनाशक" ही आंख-नाक और कान बन बुद्धि-विवेक हर लेता है. इसी पोस्ट को लेकर विपक्षियों ने लालू परिवार पर जमकर निशाना भी साधा था.