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कचहरी बवाल – 10 नामजद समेत 60 अज्ञात पर संगीन आरोपों के तहत मुकदमा

कचहरी बवाल – 10 नामजद समेत 60 अज्ञात पर संगीन आरोपों के तहत मुकदमा
Sep 17, 2025, 08:36 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: कचहरी में मंगलवार को हुए बवाल को लेकर घायल दरोगा की तहरीर पद देर रात घायल दरोगा की तहरीर पर कैंट थाने में दस नामजद और 60 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया गया. नामजद लोगों में अजीत मौर्या, मोहित मौर्या, अजीत वर्मा उर्फ राजा, राजन पांडेय, शेखर यादव, अजीत सिंह, सुमित सिंह, आलोक सौरभ, प्रकाश शंकर श्रीवास्तव और ईशान शामिल हैं. इसके अलावा 60 अज्ञात पर हत्या के प्रयास, गैरइरादतन हत्या के प्रयास, बलवा, गैरकानूनी तौर पर इकट्ठा होना. धारदार हथियार से वार. सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी काम में बाधा, डकैती के लिए चोट पहुंचाना, 7 सीएलए एक्ट समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं. आरोप है कि सभी ने लामबंद होकर लोक सेवक के कर्तव्य में बाधा डालते हुए खतरनाक हथियार से लैश होकर घेर कर गाली गलौज की. धमकी देते हुए जान से मारने की नियत से मारपीट कर मरणासन्न अवस्था में नाले में फेंक दिया. उनके पर्स से पहचान पत्र, पुलिस परिचय पत्र, 4200 रुपये छीन लिये और वर्दी फाड़ दी.


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बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा


कचहरी में मंगलवार की दोपहर दो बजे सब कुछ सामान्यक था कि इसी बीच सरकारी काम से आए बड़ागांव थाने के दरोगा मिथलेश प्रजापति (37) और कांस्टेबल राणा प्रसाद (27) को डीएम पोर्टिका में आरोपियों ने बेरहमी से पीटा और उनकी वर्दी फाड़ दी. इसके बाद एसीएम प्रथम कार्यालय में बंधक बनाकर रखा और पिटाई करते रहे. पुलिस ने किसी तरह दरोगा की जान बचाई और अस्पताल में भर्ती कराया. घायल दरोगा का बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है. दरोगा के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट लगी है. दरोगा की हालत में सुधार है. सिपाही राणा प्रसाद का जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराया गया था. बीच बचाव करने पहुंचे एसीएम के हेड मोहर्रिर को भी पीटा गया था. आरोपी अधिवक्ताओं की पहचान के लिए परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है.


दो पक्षों के भूमि विवाद ने ऐसे पकडा तूल


बता दें कि गत शनिवार को समाधान दिवस पर बड़ागांव थाने में पुआरी खुर्द निवासी मोहित सिंह मौर्य और प्रेम चंद्र मौर्य के बीच भूमि विवाद का मामला पहुंचा था. पुलिस अधिकारियों के सामने ही दोनों पक्षों में मारपीट भी हुई थी. इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों का शांतिभंग में चालान कर दिया था. मोहित सिंह मौर्य ने खुद को अधिवक्ता बताया था. मोहित का आरोप था कि दरोगा सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने अपराधी जैसा सलूक किया था. उन्हें लॉकअप में डाल दिया था. इसकी सूचना मिलने के बाद छह अधिवक्ता बड़ागांव थाने पहुंचे थे फिर उसे छोड़ा गया था. इससे मोहित नाराज था.

इस बीच मंगलवार की दोपहर 2 बजे बड़ागांव थाने के दरोगा मिथलेश प्रजापति और कांस्टेबल राणा प्रसाद एक मामले की केस डायरी के साथ कचहरी पहुंचे और एसीएम प्रथम की कोर्ट में जमा कराने का प्रयास करने लगे.


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पहले नाम पूछा, फिर किया हमला



डीएम पोर्टिको के बाहर जुटे अधिवक्ताओं ने दरोगा और कांस्टेबल से नाम, थाना पूछा. जैसे ही पता चला कि दोनों बड़ागांव थाने से आए हैं, वैसे ही आरोपियों ने हमला बोल दिया. दरोगा मिथलेश और कांस्टेबल की जमकर पिटाई की. साथ ही दरोगा को पकड़ कर एसीएम प्रथम के चेंबर में ले गए और बंधक बना लिया. बीचबचाव करने वाले एसीएम तृतीय के मोहर्रिर को भी अधिवक्ताओं ने नहीं बख्शा और जमकर पीटा.

कचहरी चौकी से चार पुलिसकर्मी पहुंचे, लेकिन मामले को नहीं संभाल सके. इसके बाद सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई। एसीपी कैंट नितिन तनेजा और कैंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा फोर्स के साथ कचहरी पहुंच गए. किसी तरह दरोगा मिथलेश को अधिवक्ताओं के चंगुल से छुड़ाया गया.

पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
वाराणसी: नगर निगम द्वारा पंचकोशी यात्रा की तैयारियों को लेकर व्यवस्थाएं तेज कर दी गई हैं. सोमवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शिवपुर स्थित पांचो पांडव मंदिर, धर्मशाला एवं पंचकोशी यात्रा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लिया.निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. यात्रा मार्ग एवं आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ सुलभ शौचालयों की नियमित सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए.भीषण गर्मी को देखते हुए धर्मशालाओं में ठहरने वाले यात्रियों के लिए कूलर और पंखों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया. नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि कूलरों में नियमित रूप से पानी भरने की व्यवस्था भी बनी रहे, ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके.ALSO READ:राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...रात्रि में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पंचकोशी मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकर लगाने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग करने के आदेश भी संबंधित विभागों को दिए.नगर निगम प्रशासन ने कहा कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा किया जा रहा है.
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. कला, चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला.भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान वायलिन वादक डॉ. एन. राजम् को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. “सिंगिंग वायलिन” के नाम से प्रसिद्ध डॉ. राजम् ने हिंदुस्तानी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लंबे समय तक प्रोफेसर और डीन के रूप में सेवाएं दीं.संक्रामक रोगों विशेषकर काला- अजार के उपचार और अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रो. श्याम सुन्दर को पद्म श्री से सम्मानित किया गया. बीएचयू में उनके नेतृत्व में काला- अजार रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और उनके शोध कार्यों को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा.पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रो. बुद्ध रश्मि मणि को भी पद्म श्री प्रदान किया गया.अयोध्या, सारनाथ और कपिलवस्तु सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर उनके शोध और उत्खनन कार्यों ने भारतीय इतिहास अध्ययन को नई दिशा दी.ALSO READ:धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवालपद्म पुरस्कारों में बीएचयू से जुड़ी हस्तियों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय परिवार और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है. शिक्षा, शोध और संस्कृति के क्षेत्र में बीएचयू की मजबूत परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है.
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
BHU doctor fasts to protest 'distortion' of religious identity, raises questions about faithवाराणसी: धर्म, आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहप्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार ने वाराणसी में उपवास शुरू किया है. सर्किट हाउस के समीप चल रहे इस उपवास के माध्यम से उन्होंने धार्मिक प्रतीकों, नामों और स्वरूपों के कथित “विकृतिकरण” तथा आध्यात्मिक भ्रम फैलाने के खिलाफ जनजागरण की जरूरत बताई.डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में भोजन, आचरण और आध्यात्मिक शुद्धता का विशेष महत्व बताया गया है. उनके अनुसार दूषित विचारों और आचरण का प्रभाव समाज की चेतना पर पड़ता है, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन भी प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि जब धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं में आस्था से इतर विचारधारा का प्रभाव बढ़ता है, तब श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा होती है.उन्होंने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण मंदिर व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों को स्थान मिला, जिनकी धार्मिक आस्था पर सवाल उठते रहे हैं. डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि इससे आम श्रद्धालु स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. उन्होंने धार्मिक और पौराणिक पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म और अधर्म, आदर्श और विरोधी प्रवृत्तियों के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है. उनका कहना है कि यदि इन भेदों को जानबूझकर धुंधला किया जाता है तो समाज की सांस्कृतिक चेतना प्रभावित होती है और नई पीढ़ी भ्रमित हो सकती है.Also Read: नमोघाट हत्‍याकांड पर सामने आया मंत्री रवींद्र जायसवाल का बयान, 5 लाख मुआवजे का एलानतमिलनाडु और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक राजनीति का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाओं और पात्रों की व्याख्या को राजनीतिक या वैचारिक लाभ के लिए बदले जाने के प्रयास हुए हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम को धर्म स्थापना का प्रतीक माना जाता है, जबकि महाभारत के पात्र कर्ण की भूमिका अलग रही है. समाज में कई बार नायक और खलनायक की छवि को मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे सही और गलत की समझ कमजोर होती है. डॉ. सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि उनका उपवास किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है.