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बैन कोडीन युक्‍त कफ सिरप की जाँच में खुलने लगी परतें, उधड़ने लगे नशे के पैतरे

बैन कोडीन युक्‍त कफ सिरप की जाँच में खुलने लगी परतें, उधड़ने लगे नशे के पैतरे
Nov 22, 2025, 10:06 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: गाजियाबाद से बनारस और बंगाल तक फैले प्रतिबंधित कोडीन युक्‍त कफ सिरप की परतें एसआईटी की जांच में खुलने लगी हैं. इसकी कडियां आसपास के जिलों में जुड़ने लगी हैं. हाल में हुई कार्रवाई से इसका खुलासा हुआ कि आरोपित नशे के इस अवैध करोबार को किस तरह अमलीजामा पहना रहे थे. पूर्वांचल में वाराणसी से लेकर जौनपुर और भदोही ही नहीं सोनभद्र से लेकर अन्‍य पड़ोसी ज‍िलों में नशे के अवैध करोबार को लेकर हलचल तेज है. कई आरोप‍ित फरार हैं तो कई माल कमाकर करोड़प‍त‍ि और अरबपत‍ि तक बन चुके हैं. जब तक जांच शुरू होती तब तक कई अंडरग्राउंड हैं तो कई माल खपाकर न‍िकलने के ल‍िए अंडरग्राउंड होकर काम कर रहे हैं. पुल‍ि‍स सक्र‍िय तब हुई जब प्रकरण ने स‍ियासी चोला ओढ़ ल‍िया और सपा ने इसमें म‍िलीभगत का आरोप लगाया. पुल‍िस लगातार सक्र‍ियता द‍ि‍खाकर कार्रवाई कर रही है लेक‍िन बड़ी मछली अभी पकड़ से बाहर ही है. मुख्‍य आरोपित शुभम जायसवाल के विदेश भागने के कयास लगाए जा रहे हैं. इसी परिप्रेक्ष्‍य में पुलिस शुभम जायसवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है.


जानिए अब तक की प्रगति


प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सीरप की करोड़ों की तस्करी के बहुचर्चित प्रकरण में वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस अब पूरी गंभीरता से पड़ताल में जुट गई है. नेताओं और पुलिस की संभावित भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस कमिश्नर ने विशेष जांच दल का गठन कर दिया है, जो पूरे नेटवर्क, संपत्तियों और फर्जी बिलिंग की गहराई से जांच कर रही है.

एडीसीपी काशी जोन सरवणन टी. एसआईटी के अध्यक्ष बनाए गए हैं, जबकि एसीपी कोतवाली अतुल अंजन त्रिपाठी सदस्य और कोतवाल दयाशंकर सिंह विवेचक नियुक्त किए गए हैं. पूरी जांच की साप्ताहिक समीक्षा डीसीपी काशी कर रहे हैं. एसआईटी ड्रग माफिया शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल और पूरे गिरोह के पिछले 10 वर्षों के अवैध कारोबार की जांच और कुंडली तैयार कर रही है.


पड़ताल की जद में ....


खरीदी गई संपत्तियाँ: मकान, कॉम्पलेक्स, होटल, मार्केट

उसके संपर्क: रिश्तेदार, दोस्त, कारोबारी सहयोगी

100 से अधिक दवा व्यवसायी और उनकी फर्में

एसआईटी की रडार पर ऐबोट हेल्थकेयर के सुपर स्टॉकिस्ट शैली ट्रेडर्स भी है, जिसे रांची से फर्जी पते पर काशी में पंजीकृत कर कारोबार चलाया जा रहा था. फर्जी बिलिंग के जरिए माल बांग्‍लादेश डिपोर्ट किया जा रहा था.


Sbhubham Jaisawal


89 लाख शीशियों का खेल—100 करोड़ की अवैध खरीद-फरोख्त


औषधि विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि शुभम नेटवर्क ने 89 लाख शीशी प्रतिबंधित कफ सीरप की खरीद–बिक्री की. इसकी बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी गई है. 93 मेडिकल स्टोरों के नाम पर 84 लाख शीशियों की बिलिंग दिखाई गई. इनमें अधिकांश दुकानें मौजूद ही नहीं थीं. नौ बंद फर्मों का इस्तेमाल फर्जी बिलिंग और नशा सप्लाई के लिए किया गया. इनमें सृष्टि फार्मा, जीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, हर्ष फार्मा, डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएम मेडिकल एजेंसी और श्री बालाजी मेडिकल शामिल हैं. जांच में सामने आया कि सप्तसागर दवा मंडी के लगभग 150 स्टॉकिस्टों पर दबाव डालकर बिलिंग कराई जाती थी. गोदाम में पहुंचने के बजाय माल सीधे शुभम जायसवाल के गोदाम भेज दिया जाता था.


फर्जी नियुक्ति और अन्‍य अनियमितताएं उजागर


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औषधि आयुक्त रोशन जैकब के निर्देशन में हुई जांच में पता चला कि शुभम एक ही समय में रांची स्थित शैली ट्रेडर्स

और वाराणसी स्थित न्यू वृद्धि फार्मा में कार्यरत रहा, जो लाइसेंसिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन है. अब तक शुभम और उसके पिता भोला जायसवाल सहित 28 दवा कारोबारियों पर वाराणसी के कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है.

शुभम विदेश भाग चुका है, उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस की तैयारी है. औषधि विभाग अब तक 76 फर्मों की जांच कर चुका है, जबकि जिन 26 फर्मों पर FIR दर्ज हुई है, उनके लाइसेंस निरस्त किए जा रहे हैं.

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेज
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेज
वाराणसी: बीएचयू, आईआईटी बीएचयू और अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में वर्ष 2022 से 2024 के बीच तीन वर्षों में हुई 200 से अधिक नियुक्तियां केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हैं. इस संबंध में उच्च स्तरीय जांच तेज हो गई है.पीएमओ की सख्ती के बाद शुक्रवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो और दिल्ली विजिलेंस टीम वाराणसी पहुंचीं. बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय में रिक्रूटमेंट सेल से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें तलब कर लीं. विजिलेंस टीम नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार और खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच कर रही है, जबकि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) भर्ती से जुड़े मनी ट्रेल और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की गोपनीय पड़ताल कर रही है. रिपोर्ट पीएमओ को देनी है.शिकायतकर्ता के द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच में भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कई चौंकाने वाली खामियां सामने आई हैं. कुछ मामलों में एक ही दिन लिखित परीक्षा आयोजित कर उसी दिन परिणाम घोषित कर दिया गया और बिना किसी अंतराल के अगले चरण की परीक्षा भी करा ली गई. नॉन-टीचिंग स्टाफ के अलावा नर्सिंग सहायक पदों पर राजस्थान और केरल के अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को विशेष जांच के दायरे में रखा गया है. शिकायतकर्ताओं ने 12 से 15 लाख रुपये तक घूस लेने के आरोपों के साथ मनी ट्रेल के साक्ष्य भी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए हैं.सर्विलांस पर लिए गए संदिग्धों के मोबाइल नंबर 12 संदिग्धों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए हैं, जिनमें से तीन पर विशेष नजर रखी जा रही है. इनके और इनके स्वजन के बैंक खाते और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है. साक्ष्य मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा सकती है.सरसुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर भी टारगेटविजिलेंस टीम ने सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में मशीनों व दवाओं की खरीद से जुड़ी फाइलों की भी जांच की. हालांकि, प्राथमिक जांच में खरीद से जुड़े दस्तावेज सही पाए गए हैं और वहां गड़बड़ी की शिकायतों की पुष्टि नहीं हुई है. यह उच्च स्तरीय जांच पूरे मार्च महीने तक चलने की संभावना है. जांच का मुख्य फोकस तीनों संस्थानों में सहायक कुलसचिव, जूनियर क्लर्क और नर्सिंग सहायकों की नियुक्तियों पर है.संदेह के घेरे में पूर्व निदेशक के कार्यकाल की 80 नियुक्तियांआईआईटी बीएचयू में भर्ती मामलों की जांच पूर्व निदेशक प्रो. पीके जैन के करीबी माने जाने वाले एक प्रोफेसर पर केंद्रित हो रही है. शिकायत के अनुसार, यह प्रोफेसर उनके कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. जांच में सामने आया है कि उस अवधि में 80 से अधिक नियुक्तियां की गईं थीं. कई मामलों में क्लर्क पद पर ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिन्हें टाइपिंग तक नहीं आती.जांच के घेरे में कई अधिकारी दिसंबर में मिली शिकायत के बाद फरवरी में गठित उच्च स्तरीय जांच टीमों ने कई अधिकारियों को जांच के दायरे में ले लिया है. सूत्रों के अनुसार, टीम को कई ऐसी फाइलें मिली हैं जिनमें गड़बड़ी के संकेत मिले हैं. कई मामलों में अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र पर किए गए हस्ताक्षर और नियुक्ति से जुड़ी आधिकारिक फाइलों में मौजूद हस्ताक्षर आपस में मेल नहीं खाते पाए गए हैं. जांच एजेंसियां संदिग्ध अभ्यर्थियों और अधिकारियों के बैंक खातों का विवरण खंगाल रही हैं ताकि कथित घूस के लेन-देन का पता लगाया जा सके. जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनकी चल और अचल संपत्तियों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं उनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक तो नहीं है.यह भी पढ़ें: योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थानजाने क्या है पूरा मामला यह पूरा मामला तब सामने आया जब आजमगढ़ निवासी अभिषेक सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को विस्तृत शिकायत भेजकर तीनों संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया. शिकायत में कहा गया है कि पे-लेवल 10 से लेकर लेवल-2 तक के पदों पर नियुक्तियों में स्थापित सरकारी नियमों की अनदेखी की गई और योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को नियुक्तियां दी गईं. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विवि में पीएमओ की कोई टीम नहीं आई है.आइआइटी बीएचयू के कुलसचिव सुमीत बिस्वास ने बताया कि नियुक्तियों से संबंधित किसी तरह की जांच के बारे मेें उन्हें कोई जानकारी नहीं है. विश्‍वविद्यालय प्रशासन फिलहाल मुंह खोलने से कतरा रहा है.
योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थान
योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थान
वाराणसी: गौ प्रतिष्‍ठा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी से धर्मयुद्ध आंदोलन का शंखनाद किया. अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश सरकार को दी गई 40 दिन की अवधि समाप्त होने से पांच दिन पहले ही आंदोलन की रणनीति के तहत लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. बीते शुक्रवार की सुबह केदारघाट स्थित विद्या मठ आश्रम स्थित गौशाला मैं सबसे पहले गौ पूजन किया गया. इसके बाद निकलकर वह पालकी पर सवार हुए और चिंतामणि गणेश मंदिर जा पहुंचे. वहां 11 बटुकों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत और स्वस्तिवाचन किया. मंदिर में गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद वह संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंग बाण का पाठ किया. इसके बाद जयकारों के साथ अपनी वैनिटी वैन में सवार होकर लखनऊ के लिए प्रस्थान किया.जिंदा हिंदू लखनऊ चलेंस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने ही वोट से चुनी गई सरकार के सामने गौ रक्षा के लिए धर्म युद्ध करना पड़ रहा है. इस दौरान उनके शिष्यों ने लोगों के बीच एक पंफलेट वितरित किया, जिसमें लिखा था "जिंदा हिंदू लखनऊ चलें". "गौ माता की जय", "शंकराचार्य भगवान की जय", "हर हर महादेव" के उद्घोष के बीच लगभग 20 गाड़ियों के काफिले के साथ उन्होंने लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. पत्रकारों द्वारा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान के संदर्भ में पूछे जाने पर कि "गौ माता को कोई खरोच नहीं पहुंचा सकता", स्वामी ने कहा कि यह सही समय है कि जो भी कहना है, वह कह दें. कोई पक्ष में बोलेगा, कोई विपक्ष में, लेकिन जो सच है, वह सभी जानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जो कालनेमि हैं, वे कुछ नहीं बोलेंगे.यह भी पढ़ें: ईरान को बर्बाद करने में जुटा अमेरिका, आज रात मिसाइल लॉन्चर-फैक्ट्रियां होंगी तबाहसंकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसासंकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण आदि का पाठ कर लखनऊ के धर्म युद्ध यात्रा के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद निकले तो वाराणासी के बाबतपुर मार्ग पर पहुंचने के साथ ही रास्‍ते में जगह- जगह उनका स्वागत भी हो रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह आंदोलन गौ माता की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. उनका मानना है कि गौ माता की सुरक्षा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है. बता दें कि कांग्रेस और सपा ने भी उनके आंदोलन को समर्थन किया है.शंकराचार्य द्वारा प्रस्तावित सभा कार्यक्रम को अभी तक नहीं मिली है अनुमतिशंकराचार्य के लखनऊ में प्रस्तावित होने वाले सभा कार्यक्रम को अभी तक किसी भी प्रकार के प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली है. बावजूद इसके शंकराचार्य कार्यक्रम को लेकर अड़े हुए हैं. उनका मानना है कि जो भी औपचारिकताएं हैं हमने पूरी कर ली है. जो फीस है वह भी हमने जमा कर दिया है. हमें उम्मीद है कि तीन-चार दिनों के अंदर हमें अनुमति मिल जाएगी. वाराणसी प्रशासन से सहयोग के संदर्भ मे बोले शंकराचार्य प्रशासन ने हमें रोक नहीं मतलब यात्रा की अनुमति है. भीड को लेकर के बोले शंकराचार्य मुझे नहीं पता कॉल मेरे साथ है मैं यहां से अकेला निकल रहा हूं जो भी होगा साथ आएगा.
ईरान को बर्बाद करने में जुटा अमेरिका, आज रात मिसाइल लॉन्चर-फैक्ट्रियां होंगी तबाह
ईरान को बर्बाद करने में जुटा अमेरिका, आज रात मिसाइल लॉन्चर-फैक्ट्रियां होंगी तबाह
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा जंग का आज आठवां दिन है. ये लड़ाई किसी भी हाल में रूकने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने आज शनिवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा है कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा. इसी के आगे उन्होंने ये भी कहा कि, इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुंचाना है. इस कार्रवाई से ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी हद तक कमजोर किया जाएगा. इससे भी खास बात तो यह है कि, भारत का हमसफर कहलाने वाला रूस इस जंग के बीच ईरान को खुफिया मदद देने में लगा हुआ है, वो भी बंद दरवाजे के पीछे से ये सहायता दी जा रही है.इजराइल ने किया मेहराबाद एयरपोर्ट पर हवाई हमला दरअसल, बीते शुक्रवार की देर रात को इजराइल ने तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर हवाई हमला किया था, जिसके चलते भयंकर आग और धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया. वहीं, इस जंग में अमेरिका और इजराइल को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रूस द्वारा ईरान की मदद की जा रही है. इसी सिलसिले में मॉस्को ने ईरान को मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य विमानों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई है.रूस की राजधानी मॉस्कों ने ईरान को मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य विमानों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई है. वॉशिंगटन पोस्ट ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि, रूस इस जंग से निपटने के लिए ईरान को ऐसी टारगेटिंग इंटेलिजेंस दे रहा है, जिससे वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को आसानी से निशाना बना सके.यह भी पढ़ें: नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी, बालेन शाह ने मारी बाजीभारत ने की ईरान की मदद ईरान का एक युद्धपोत जिसका नाम IRIS है, लावन भारत के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है. इन्हीं सब दिक्कतों की वजह से ईरान ने 28 फरवरी को तकनीकी खराबी आने के बाद भारत से मदद मांगी थी. जिसे स्वीकार करते हुए भारत ने 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दी और इसके बाद 4 मार्च को यह बंदरगाह पर ईरान की मदद के लिए जा पहुंचा. जहाज के 183 क्रू मेंबर फिलहाल कोच्चि में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं. IRIS नाम का लावन युद्धपोत हाल ही में भारत में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 और मिलान 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था, जो 15 से 25 फरवरी के बीच आयोजित हुए थे. इससे पहले अमेरिका ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS लावन देना को श्रीलंका के पास हमला कर उसे डुबों दिया था. इस हमले में लगभग 87 ईरानी नौसैनिकों की जान चली गई है.इजराइल को हथियार दें रहा अमेरिका बताया रहा है कि, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग में इजराइल को लगभग 151.8 मिलियन डॉलर के हथियार अमेरिका देने को तैयार है, क्योंकि अमेरिका ईरान को बर्बाद करने के लिए इजराइल का साथ देने में जरा भी चूकना नहीं चाहता है. इतना ही नहीं इसी बर्बादी के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा को उनका उत्तराधिकारी मानने से इनकार तक कर दिया था. ये वहीं अमेरिका है जिसकी वजह से US-इजराइल हमलों में ईरान में 1332 लोगों की मौत हो चुकी है. साथ ही ईरान में 1300 हमले, 14 मेडिकल सेंटरों को निशाना बनाया गया है. ईरान के हालात इतने बद से बत्तर हो चुके है कि कई जगहों पर पानी-बिजली की सप्लाई तक ठप हो चुकी है. ऐसे में दावा किया जा रहा है कि, ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर भी तबाह हुए है. जिससे ईरान को भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है, इस नुकसान को लेकर ईरान का कहना है कि, कुवैत-बहरीन और UAE में 20 अमेरिकी बेस को नुकसान पहुंचा है.ईरान को बर्बाद करने में लगे ट्रम्पअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान की तबाही के लिए जमीनी स्तर पर अपने अमेरिकी सैनिकों को भेजने की फिराक में हैं. यह जानकारी कई सूत्रों के हवाले से दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के सहयोगियों और रिपब्लिकन नेताओं के साथ हुई बातचीत में युद्ध के बाद ईरान के भविष्य को लेकर अपनी योजनाओं की पोल खोली, जहां इन योजनाओं में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तेल के क्षेत्र में सहयोग की संभावना की बात कही है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प बड़े पैमाने पर जमीनी हमला करने की योजना पर चर्चा करने के बजाय वह सीमित संख्या में अपने अमेरिकी सैनिकों को विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए भेजने का विचार कर रहे हैं. हालांकि, अभी तक इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी तरह का कोई भी आधिकारिक निर्णय नहीं किया है.