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जाने कैसे बनारसी पान और बर्फी ने भी लड़ी आज़ादी की ‘लड़ाई’

जाने कैसे बनारसी पान और बर्फी ने भी लड़ी आज़ादी की ‘लड़ाई’
Aug 15, 2025, 08:29 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: जब हम स्वतंत्रता संग्राम की कहानियाँ सुनते हैं तो ज़हन में सबसे पहले रणभूमि की तस्वीर, नेताओं के जोशीले भाषण, जेल की सलाखें और जुलूसों का शोर गूंजता है. लेकिन बनारस की धरती पर आज़ादी की लड़ाई सिर्फ नारेबाजी और हथियारों से ही नहीं लड़ी गई थी. यहां के पान की महक और मिठाई की मिठास में भी देशभक्ति का रंग घुला हुआ था.बनारसी पान और तिरंगी बर्फी इस अनोखे ‘स्वाद भरे आंदोलन’ के गुप्त सिपाही थे.



पान की गिलौरी में छुपे आज़ादी के संदेश


बनारस का पान सदियों से मशहूर है, लेकिन 1920 और 1930 के दशक में यह सिर्फ स्वाद का आनंद नहीं देता था, बल्कि गुप्त संदेशों का वाहक भी बन चुका था .क्रांतिकारी पान के पत्तों में छोटे-छोटे कागज़ के टुकड़े लपेटकर भेजते, जिन पर आंदोलन की योजनाएं या महत्वपूर्ण संदेश लिखे होते थे .चौक, मैदागिन और गोदौलिया जैसे इलाकों की पान की दुकानें स्वतंत्रता सेनानियों की गुप्त बैठक स्थली बन गईं. यहां चाय या पान खाते-खाते ही आंदोलन की रणनीतियां तैयार होतीं और नए साथियों को जोड़ने की योजनाएं बनतीं. अंग्रेजी पुलिस को शक भी नहीं होता, क्योंकि पान खाना बनारस की रोजमर्रा की आदत थी.

तिरंगी बर्फी की मीठी क्रांति


इसी दौर में चौक इलाके के प्रसिद्ध हलवाई लाला बद्री प्रसाद ने मिठाई को भी आज़ादी का पैगाम देने का माध्यम बना दिया . उन्होंने तीन रंगों वाली खास बर्फी तैयार की ऊपर केसरिया, बीच में सफ़ेद और नीचे हरा , यह रंग उस समय के स्वतंत्रता आंदोलन का आधार बने.यह तिरंगी बर्फी केवल मिठाई नहीं थी, बल्कि मौन क्रांति का प्रतीक बन गई. इसे देखते ही लोगों के दिलों में जोश भर जाता थ. क्रांतिकारी और छात्र इसे खरीदने के बहाने दुकान पर आते, बातचीत करते और आंदोलन की खबरें आपस में साझा करते.अंग्रेजी प्रशासन ने जब देखा कि एक मिठाई भी देशभक्ति की लहर फैला रही है, तो उन्होंने लाला बद्री प्रसाद को चेतावनी दी और इस पर रोक लगाने की कोशिश की.लेकिन बनारस के लोग पीछे हटने वाले में से नहीं थे. कई हलवाई गुप्त रूप से तिरंगी बर्फी बनाकर अपने ग्राहकों तक पहुँचाते रहे. कभी-कभी बर्फी के डिब्बों में भी गुप्त संदेश छुपाकर भेजे जाते थे.


काशी का बौद्धिक मोर्चा


जहाँ देश के दूसरे हिस्सों में बड़े-बड़े राजनीतिक आंदोलन चल रहे थे, वहीं काशी ने स्वतंत्रता संग्राम में बौद्धिक ताकत का योगदान दिया. BHU, कटरा और मदनपुरा जैसे इलाकों में कवि, लेखक और छात्र मिलकर देशभक्ति के विचार फैलाते.नाटक, कविताएँ, गीत, और अखबार सब आज़ादी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का हथियार बने. काशी की यही बौद्धिक ताकत देशभर के आंदोलनों को ऊर्जा देती रही.



पान और बर्फी: स्वाद में लिपटी क्रांति


यह वाकई अनोखी बात है कि बनारस की पहचान माने जाने वाले पान और बर्फी, दोनों ही उस दौर में आंदोलन के ‘खामोश हथियार’ बने. पान की गिलौरी में गुप्त संदेश पहुंचता, तो तिरंगी बर्फी लोगों के दिलों में जोश भरती. ये साधारण सी लगने वाली चीज़ें उस समय जनता में एकता और देशभक्ति का भाव जगाने का ज़रिया थीं.


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आज भी ज़िंदा है स्वाद और यादें


आज, स्वतंत्रता के 79 साल बाद भी, बनारसी पान और चौक की तिरंगी बर्फी अपने स्वाद और शान के लिए मशहूर हैं.अब ये राजनीतिक प्रतीक तो नहीं, लेकिन सांस्कृतिक धरोहर ज़रूर हैं.बुज़ुर्ग बताते हैं कि जब वे तिरंगी बर्फी का स्वाद लेते हैं या पान की गिलौरी मुंह में रखते हैं, तो उन्हें आज़ादी के उस दौर की याद ताज़ा हो जाती है . जब हर निवाले और हर कौर में देश के लिए कुछ करने का जज़्बा छुपा होता था.

सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी
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वाराणसी: केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (सीआईएचटीएस), सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी ने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को भारत की आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी ऐतिहासिक स्थल को मिला सम्मान नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानव कल्याण के संदेश को पूरी दुनिया द्वारा स्वीकार किए जाने का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस के 2605वें आयोजन से ठीक पहले मिली यह उपलब्धि सारनाथ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को नई ऊंचाई प्रदान करती है। यही वह पावन स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र का प्रवर्तन किया था। आज भी यह स्थान विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।प्रो. नेगी ने कहा कि भारत की पहचान केवल अपनी प्राचीन सभ्यता से नहीं, बल्कि उन सार्वभौमिक मूल्यों से है जिन्हें भगवान बुद्ध ने मानवता के सामने रखा। सत्य, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व का उनका संदेश वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।ALSO READ : शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।कुलपति ने देशवासियों और विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सारनाथ अब केवल इतिहास का साक्षी नहीं, बल्कि विश्व शांति और मानवता के साझा भविष्य का भी प्रेरणा-स्थल बनकर उभरेगा। उन्होंने अंत में कामना की कि भगवान बुद्ध का करुणा और मैत्री का संदेश संपूर्ण विश्व में सद्भाव, शांति और मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता रहे।
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
वाराणसी: मंडुआडीह थाना पुलिस ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शनिवार तड़के बरेका (बीएलडब्ल्यू) आवासीय परिसर से गिरफ्तार किया गया।पुलिस के अनुसार, लहरतारा निवासी एक महिला की तहरीर पर 24 जुलाई को आरोपी किशन कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69, 115(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी।मामले की विवेचना उपनिरीक्षक प्रवीण सचान कर रहे हैं। पुलिस टीम ने 25 जुलाई की रात करीब 12:25 बजे आरोपी किशन कुमार (30), निवासी लहरतारा, को बीएलडब्ल्यू आवासीय परिसर से गिरफ्तार कर लिया।ALSO READ : गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजापूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि युवती से उसकी मित्रता थी और दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद वह वाराणसी छोड़कर जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक प्रवीण सचान, उपनिरीक्षक विवेक यादव, फैंटम-48 के कांस्टेबल अमित कुमार तिवारी तथा कांस्टेबल संदीप शाह शामिल रहे। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम  पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
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वाराणसी: गुरु पूर्णिमा पर्व पर पड़ाव स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह के अवधूत भगवान राम आश्रम में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। 28 और 29 जुलाई को होने वाले आयोजन के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्र ने शनिवार को आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान एडीसीपी ने यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास मार्ग सहित अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।ALSO READ : काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.पुलिस प्रशासन ने गुरु पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए विशेष ट्रैफिक एवं पार्किंग प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रमुख मार्गों पर यातायात का सुचारु संचालन, पार्किंग स्थलों का निर्धारण तथा आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे गुरु पूर्णिमा का आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।