बाढ़ पूर्वानुमान के लिए LiDAR तकनीक, अब आपदा प्रबंधन होगा आसान

वाराणसी - गंगा और वरुणा नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी को तकनीकी सुरक्षा कवच दिया है. “3-D Urban Spatial Digital Twin” परियोजना के तहत करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से यह काम 9 महीनों में पूरा किया गया. इसमें पूरे शहर का डिजिटल मॉडल तैयार किया गया है, जो बाढ़ प्रबंधन और शहरी विकास दोनों में मदद करेगा.
160 वर्ग किमी क्षेत्र का डिजिटल नक्शा
LiDAR (Light Detection and Ranging) और GIS-मैपिंग तकनीक की मदद से वाराणसी के 160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को हवाई और ग्राउंड उपकरणों से स्कैन किया गया. इस प्रक्रिया में 75 से अधिक थीमैटिक लेयर्स जोड़ी गई हैं, जिससे नदियों, नालों, सड़कों और मकानों की त्रि-आयामी जानकारी मिली है. लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग एक रिमोट सेंसिंग तकनीक है जो दूरी मापने और वातावरण के विस्तृत 3डी मानचित्र बनाने के लिए लेजर प्रकाश का उपयोग करती है.

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पहले से मिलेगा बाढ़ का अलर्ट
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक से बाढ़ की आशंका वाले इलाकों की पहचान पहले ही हो जाएगी . यह मॉडल बताएगा कि किस क्षेत्र में कितना जलभराव हो सकता है . इस जानकारी के आधार पर प्रशासन को समय रहते अलर्ट मिल जाएगा और राहत-बचाव कार्य तेजी से शुरू किए जा सकेंगे .

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आपदा प्रबंधन में नई उम्मीद
जिला प्रशासन और स्मार्ट सिटी अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने, राहत सामग्री वितरण और पुनर्वास जैसे काम अधिक पारदर्शिता और गति से किए जाएंगे . इसके लिए संबंधित विभागों को इस डिजिटल मॉडल के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया गया है . स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह पहल काशी जैसे प्राचीन और घनी आबादी वाले शहर के लिए बाढ़ प्रबंधन में एक मील का पत्थर साबित होगी.



