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खंड स्नातक व खंड शिक्षक निर्वाचन की तैयारियों की बैठक में शामिल हुए आठ जिलों के अधिकारी संग राजनीतिक दलों के पदाधिकारी

खंड स्नातक व खंड शिक्षक निर्वाचन की तैयारियों की बैठक में शामिल हुए आठ जिलों के अधिकारी संग राजनीतिक दलों के पदाधिकारी
Sep 29, 2025, 11:44 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसीः मंडलायुक्त एस राजलिंगम की अध्यक्षता में कमिश्नरी सभागार खंड स्नातक व खंड शिक्षक निर्वाचन की तैयारियों को लेकर सोमवार को बैठक हुई. इसमें वाराणसी खंड स्नातक एवं खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शामिल सभी आठों जिलों बलिया, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर के एडीएम समेत समस्त मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े.

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चुनाव के हर पहलु से कराया गया अवगत


बैठक में मंडलायुक्त द्वारा वाराणसी खंड स्नातक एवं खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण और मतदेय स्थलों के संशोधन प्रस्तावों के संबंध में सभी को जानकारियां दी गई. एक नवम्बर से प्रारंभ होने वाले पुनरीक्षण कार्य और मतदेय स्थलों के संशोधन की प्रक्रिया से सभी पक्षों को अवगत कराते हुए मंडलायुक्त ने निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक पात्र व्यक्ति, जो भारत का नागरिक हो और क्षेत्र का सामान्य निवासी हो, 01 नवम्बर, 2025 से तीन वर्ष पूर्व किसी विश्वविद्यालय से स्नातक या समकक्ष योग्यता प्राप्त होने पर ही निर्वाचक नामावली में पंजीकृत हो सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि थोक में जमा किए गए आवेदन, चाहे प्रत्यक्ष हों या डाक द्वारा, केवल समावेशन के लिए विचार किए जाएंगे. संस्थाओं के अपने अधीन कार्यरत सभी कर्मचारी अपने आवेदन अग्रसारित कर सकते हैं. आवेदन के साथ मूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है या स्वप्रमाणित दस्तावेज पदनामित अधिकारी द्वारा सत्यापित होने चाहिए. आवेदन ईआरओ/एईआरओ या संबंधित पदनामित अधिकारी को व्यक्तिगत या डाक द्वारा प्रस्तुत किए जा सकते हैं.


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शिक्षक का संपूर्णकालिक होना आवश्यक


शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के संबंध में मंडलायुक्त ने बताया कि निर्वाचक बनने के लिए व्यक्ति को संबंधित क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष के लिए राज्य के विनिर्दिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में अध्यापन कार्य करना अनिवार्य है. यह तीन वर्ष की अवधि सतत या विच्छिन्न अवधि में हो सकती है. शिक्षक चाहे नियमित हों या तदर्थ, उन्हें संपूर्णकालिक होना आवश्यक है. अंशकालिक शिक्षक निर्वाचक नामावली में पंजीकरण के पात्र नहीं हैं.

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कमिश्नर ने गलत जानकारी देने वालों को दी चेतावनी


मंडलायुक्त ने फार्म-19 के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें आवेदन के साथ शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख द्वारा नियुक्ति की पुष्टि करते हुए प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा. किसी भी आवेदन में मिथ्या जानकारी देने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी. बैठक में समस्त राजनीतिक दलों को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और पुनरीक्षण कार्यक्रम से अवगत कराया गया.

आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
Salim-Javed: जावेद अख्तर और सलीम खान ने अलग होने से पहले 24 फिल्मों में साथ काम किया था, जिनमें से 22 हिट रही थी. जिनमें दीवार, शोले, डॉन और जंजीर जैसी फिल्में हिंदी सिनेमा को देने वाली मशहूर जोड़ी सलीम-जावेद पर प्राइम वीडियो ने डॉक्युसीरीज एंग्री यंग मेन रिलीज की है. इस सीरीज में सलीम-जावेद जोड़ी के सलीम खान और जावेद अख्तर से जुड़ी अनदेखी और अनकही बातों को पेश किया गया है. इस सुपरहिट जोड़ी ने एक साथ 24 फिल्मों की कहानी संग संवाद लिखे जो ब्लॉकबस्टर रही. लेकिन 21 जून 1981 को ये जोड़ी ऐसे टूटी मानों इन दोनों के बीच का एक गहरा रिश्ता चकनाचूर हो गया. वो जोड़ी जिसका कलम चलाना फिल्म के हिट होने की गारंटी थी.पल भर में कैसे बिखर गई बेस्ट जोड़ीये वहीं जोड़ी है जिसने विज्ञापन देकर शोले के हर सेंटर से एक करोड़ रुपये कमाने का दावा किया था, फिर फिल्म का ये आंकड़ा तीन करोड़ तक पहुंच गया. वो जोड़ी जिसने जंजीर के पोस्टर पर खुद ही एक पेंटर को पैसे देखकर सलीम जावेद का नाम लिखवा दिया था. वो जोड़ी जो एक समय फिल्म के हीरो से ज्यादा फिल्म लिखने की फीस ले रही थी. इस जोड़ी ने सिर्फ 18 दिन के अंदर ब्लॉकबस्टर फिल्म दीवार लिख डाली थी. इतनी खूबिया होने के बाद भी ये जोड़ी बिखर कर रह गई, जिसका कारण हर कोई जानना चाहता है.इसे लेकर एंग्री यंग मेन में एक प्रसिद्ध भारतीय कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैंजावेद अख्तर खुद बताते हैं कि जोड़ी कैसे टूटी. उन्होंने बताया कि करियर का बसंत जा रहा था. हमारे काम में थकान आ रही थी. कभी हम दोनों 24 में से 18 घंटे साथ रहते थे. लेकिन अब हमारे सर्कल अलग हो रहे थे. दोस्त अलग हो रहे थे. इस तरह मैंने अलग होने का फैसला लिया, इस पर सलीम खान ने कहा कि जावेद अलग होना चाहते थे. ऐसे में रोकने के कोई मायने नहीं थे. इस तरह 1981 में भारतीय सिनेमा के इतिहास की ये सबसे सफल जोड़ी अलग हो गई.सलीम और जावेद के अलग होने पर रो पड़ी स्क्रिप्टराइटिंग पर अफसोस सलीम और जावेद के अलग होने के बाद ये जोड़ी अकेले-अकेले स्क्रिप्टराइटिंग की दुनिया में कुछ भी यादगार नहीं कर सकी. हालांकि सलीम खान ने नाम जैसी फिल्म लिखी और जावेद अख्तर ने बेताब, मशाल और अर्जुन जैसी फिल्में. लेकिन सलीम-जावेद जैसा इतिहास ये दोहरा नहीं पाए. हालांकि सलीम-जावेद से अलग होने के बाद जावेद अख्तर ने गीतकार के तौर पर अपनी पहचान कायम कर ली. उनके सलीम खान से अलग होने की एक वजह उनका लिरिक्स की दुनिया की ओर रुझान भी बताया जाता है. लेकिन इस जोड़ी का अलग होना सिर्फ उनके फैन्स का नुकसान था बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी बहुत बड़ा आघात था.
वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
वाराणसी : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 18 जनवरी रविवार को बूथ पर मतदाता सूची पढ़े जाने की तिथि नियत की गयी है. इस तिथि पर सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने नियत मतदेय स्थलों पर प्रातः 10.30 बजे से सायं 4.30 बजे तक ए०एस०डी०/अन कलेक्टेबल सूची के साथ उपस्थित रहकर आलेख्य मतदाता सूची पढ़ेंगे तथा फार्म-6, 6ए 7 एवं 8 प्राप्त करेंगें.अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी बिपिन कुमार ने बताया कि उक्त तिथि पर जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा पर्यवेक्षकीय अधिकारियों द्वारा बूथों का भ्रमण किया जायेगा. भ्रमण के दौरान यदि कोई बूथ लेविल आफिसर अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके विरूद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी. उक्त अभियान दिवसों के दिन जनपद के समस्त शिक्षण संस्थान/कार्यालय एवं अन्य संस्थान जहाँ पर मतदेय स्थल स्थापित है, खुले रहेंगे.ALSO READ : जनसंचार बनाम सोशल मीडिया : पत्रकारिता व्यक्ति-केंद्रित होती जा रही है - प्रो. केजी सुरेशउन्होंने जनसामान्य से अपील की है कि 18 जनवरी को अपने निर्दिष्ट बूथ पर जाकर आलेख्य प्रकाशित मतदाता सूची में अपना नाम देख सकते हैं तथा 01 जनवरी, 2026 को जिनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो गयी हो अथवा पूर्ण हो रही हो और उनका नाम अभी तक मतदाता सूची में दर्ज नही हो पाया है, वे उक्त तिथि को अपने मतदान केन्द्र पर उपस्थित होकर निर्वाचक नामावली में अपना नाम सम्मिलित कराने हेतु फार्म-6 मय घोषणा पत्र (अनुलग्नक-4) के साथ निर्धारित प्रपत्र (नए मतदाताओं के लिए), फार्म-7 (मतदाता सूची से नाम अपमार्जन हेतु) एवं फार्म-8 (मतदाता सूची में प्रविष्टि में संशोधन अथवा स्थानान्तरण किये जाने हेतु) में पूर्ण विवरण भरकर एवं आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर बी.एल.ओ. को उपलब्ध करा दें. मतदाताओं द्वारा ऑनलाइन के माध्यम से आयोग के ऐप ECINET mobile app एवं वेबसाइट https://voters.eci.gov.in के माध्यम से भी फार्म-6 (घोषणा-पत्र के साथ निर्धारित प्रपत्र) फार्म-7 एवं फार्म-8 भरकर सबमिट कर सकते हैं.
BMC हार से तिलमिलाए राज ठाकरे, सामने आया रिएक्शन
BMC हार से तिलमिलाए राज ठाकरे, सामने आया रिएक्शन
बृहन्मुंबई नगर निगम यानि (BMC) के सामने आए चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है. ठाकरे परिवार के हाथों से मुंबई महानगरपालिका की सत्ता जो छिन्न गई है. जी हां, चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों ने ही 'मराठी मानुस' और 'क्षेत्रीय अस्मिता' के मुद्दे पर पीछे न हटने का संकल्प ले बैठे है. जहां राज ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर मराठी लोगों के खिलाफ कुछ भी हुआ तो हम सत्ता में बैठे लोगों का ऐसा हाल करेंगे कि उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर होना ही पड़ेगा. क्योंकि, हमारा संघर्ष मराठी लोगों के लिए, मराठी भाषा के लिए, मराठी पहचान के लिए और एक समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है और हमेशा रहेगा.यही संघर्ष हमारा अस्तित्व है. इसलिए इन मराठियों के हक के लिए हम हमेशा ही लड़ेगा, जरूरी नहीं कि ये हक की लड़ाई सत्ता में रहकर ही लड़ी जाए, बिना सत्ता के भी इस संघर्ष को जीता जा सकता है. इन बातों का मतलब साफ है, अक्सर सत्ताधारी ताकतें और उनके संरक्षण में रहने वाले लोग मराठियों का शोषण करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ेंगे. इसलिए, हमें अपने मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए, चुनाव तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारी सांसों में मराठी बसी है. वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने एक पोस्ट में दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है', यह तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी लोगों को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसके वे हकदार हैं.मराठियों के लिए संघर्ष का संकल्प जानकारी के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 227 वार्डों में से 65 में जीत हासिल की है, अपने चाचा बाल ठाकरे के नक्शेकदम पर चलने वाले राज ठाकरे ने कहा कि इस हार का मतलब यह नहीं है कि हिम्मत हार जाएंगे और हार मान लेंगे. उन्होंने अपने राज्य और मराठियों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है.मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ावहीं, राज ठाकरे ने आगे कहा कि चाहे एमएमआर क्षेत्र हो या पूरा राज्य, सत्ताधारी ताकतें मराठी लोगों को परेशान करने और उनका शोषण करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. इसलिए, हमें अपने मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए. मुंबई चुनाव में मिली हार के बाद राज ठाकरे ने कहा कि हम उन सभी चीजों का विश्लेषण करेंगी और जो गलती हुई है, उसमें सुधार करेंगे। उन्होंने पार्टी को बिल्कुल नए सिरे से खड़ा करने का संकल्प लिया.