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बनारस की तवायफ़ों का देश की आज़ादी की लड़ाई में रहा अहम योगदान

बनारस की तवायफ़ों का देश की आज़ादी की लड़ाई में रहा अहम योगदान
Aug 15, 2025, 10:02 AM
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Posted By Anurag Sachan

Varanasi: भारत को आज़ाद हुए 78 साल बीत गए . यह एक लंबे संघर्ष, बलिदान, जनआंदोलनों और आजादी के लिए लड़ने की गाथा है. यह सिर्फ एक दिन की घटना नहीं थी,बल्कि 200 सालों से ज़्यादा चले अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ़ एक विशाल और जटिल आंदोलन का परिणाम था .यह सफर केवल राजनेताओं, क्रांतिकारियों और सेनानियों का ही नहीं था, बल्कि समाज के उन तबकों का भी था जिन्हें इतिहास ने अक्सर भुला दिया. उनमें बनारस की तवायफ़ें भी शामिल रहीं.


इन महिलाओं ने आज़ादी के संघर्ष में जो भूमिका निभाई, वह सराहनीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायक भी रही है. ...और उन्हें इस आज़ादी की भारी कीमत भी चुकानी पड़ी.



कोठों को आज़ादी के आंदोलन का बना दिया अड्डा


बनारस- सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, बनारस की दालमंडी में बसा था तवायफ़ों का संसार, ये महिलाएं केवल नृत्य-गायन की कलाकार ही नहीं थीं, बल्कि देशभक्ति से लबरेज़ जागरूक नागरिक भी थीं. अंग्रेज़ी हुकूमत के दौरान जब देशवासी आज़ादी की चिंगारी जगा रहे थे, तब बनारस की तवायफ़ें भी इस जंग में कूद पड़ीं. उन्होंने अपने कोठों को आज़ादी के आंदोलन का अड्डा बना दिया, जहां एक तरफ आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे देश भक्त(क्रांतिकारियों) को पनाह मिली. वे अपने साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ छुप कर लड़ने की योजनाए बनाते , वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजों की नज़र से बचकर संदेश एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाते. कई तवायफ़ें खुद भी गुप्तचर बनकर अंग्रेज़ी हुकूमत की जानकारी क्रांतिकारियों तक पहुंचाती थीं.



सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनजागरण भी किया


इतना ही नहीं, 19वीं शताब्दी के शुरुआत में यहां के कई चौराहे और गलियों में महफिल सजती थी. (बनारस) चौक थाने के पास भी यह सजाई जाती थी. यहां अक्सर तवायफ़ अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनजागरण करती थीं. वे देशभक्ति गीत गाकर लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ़ खड़ा होने की प्रेरणा देती थीं. काशी के राज दरबारों, रईसों की कोठियों के अलावा मंदिरों और मठों में भी इनकी संगीत की महफिल जमा करती थी.


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उनके द्वारा सजाई गई संगीत की महफिल से तथा रईसों से पैसा जुटाकर क्रांतिकारियों को मुहैया कराया जाता था. इनकी महफिल अक्सर शाम छह बजे के बाद ही सजती थी. इसमें मिलने वाले पैसों को वह चुपके से क्रांतिकारियों को दिया करती थीं. इसको लेकर कई बार अंग्रेज अफसरों ने उनके यहां छापा भी मारा था.



इन तवायफों का रहा महत्वपूर्ण योगदान


गौहर जान, मोहम्मदी बेगम, हुस्नाबाई ,अजीजन बाई ,जद्दन बाई आदि तवायफों का योगदान स्वतंत्रता के आंदोलन में महत्वपूर्ण रहा है .

पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- भारत में LPG गैस की कमी नहीं...
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- भारत में LPG गैस की कमी नहीं...
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के चलते देशभर में गैस सिलेंडर को लेकर काफी किल्लते देखने को मिल रही है. जी हां, एलपीजी गैस संकट पर लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक बड़ा बयान दिया और कहा भारत 40 देशों से क्रूड ऑयल ले रहा है, ऐसे में गैस सिलेंडर पर पैनिक होने की कोई बात नहीं है. इतना ही नहीं हरदीप सिंह पुरी ने वेस्ट एशिया संकट पर ये भी कहा कि एनर्जी के इतिहास में दुनिया ने ऐसा दिन पहले कभी नहीं देखा था, होर्मुज स्ट्रेट को इतिहास में पहली बार कमर्शियल शिपिंग के लिए बंद कर दिया गया है. संघर्ष पैदा करने में कोई भी भूमिका नहीं है, इसलिए भारत को किसी भी हाल में इसके सभी नतीजों से निपटना ही होगा.यह भी पढ़ें: गैस संकट को लेकर उठने वाले सवालों पर मंदिर प्रशासन ने लगाया विराम, कही ये बात"भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई की स्थिति सुरक्षित"मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने बयानों में ये बताया कि, भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई की स्थिति सुरक्षित है. पिछले पांच दिनों में, रिफाइनरी के निर्देशों के जरिए LPG का प्रोडक्शन 28% बढ़ा दिया गया है और असल में आगे की खरीद चल रही है. इस संकट में मोदी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीबों और जरूरतमंदों की रसोई में किसी भी तरह के संकट से जूझना ना पड़े. घरेलू सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है और डिलीवरी साइकिल में कोई बदलाव नहीं हुआ है.हरदीप सिंह ने कहा- इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन सुरक्षितहरदीप सिंह पुरी ने कहा कि, बड़े LNG कार्गो लगभग रोज दूसरे सप्लाई रास्तों से आ रहे हैं. भारत के पास गैस प्रोडक्शन और सप्लाई के इतने इंतजाम हैं कि लंबे समय तक लड़ाई चलने पर भी यह स्थिति बनी रहेगी. हर घर और इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन पूरी तरह से सुरक्षित है. अब प्रोक्योरमेंट को एक्टिवली डायवर्सिफाई किया गया है और कार्गो को यूनाइटेड स्टेट्स, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से मंगाया जा रहा है.
गैस संकट को लेकर उठने वाले सवालों पर मंदिर प्रशासन ने लगाया विराम, कही ये बात
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