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इस बार नवरात्र दस दिन का, हाथी पर सवार होकर आयेंगी मां

इस बार नवरात्र दस दिन का, हाथी पर सवार होकर आयेंगी मां
Sep 02, 2025, 12:57 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: शक्ति अराधना के महापर्व शारदीय नवरात्र का प्रारम्‍भ 22 सितंबर, सोमवार से हो रहा है. नवरात्र के शुरू होने के साथ ही शिव नगरी शक्ति की साधना में डूब जायेगी. घरों से लेकर मंदिरों तक कलश स्‍थापित कर मां की पूजा अर्चना की जायेगी. पर खास ये कि आमतौर पर नौ दिनों का होने वाला नवरात्र इस बार दस दिन का होगा.


चतुर्थी तिथ‍ि दो दिन


ज्‍योतिर्विद पंडित चक्रपाणि भटट् के ने बताया कि नवरात्र के पहले पड़ने वाले पितृपक्ष में 14 दिन का ही होगा वहीं नवरात्र में चतुर्थी तिथि के दो होने के चलते नवरात्र इस बार दस दिन का होगा. इसलिए उदयातिथि के अनुसार श्री दुर्गा सप्‍तशति के पाठ संकल्‍प में ‘चतुर्थ्‍यां तदुपटि पंचक्‍यां तिथौ’ का उच्‍चारण किया जायेगा. पाठ की पूर्णाहुति बुधवार एक अक्‍टूबर को दिन में 2.36 बजे तक किया जा सकेगा.


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गज पर आगमन शुभ


शारदीय नवरात्र में मां के आगमन और प्रस्‍थान के वाहन का बड़ा महत्‍व है. शास्‍त्रों में वाहन के प्रकार के अनुसार ही उसे प्रजा या सामान्‍य जन के लिए शुभ या कष्‍ट देने वाला बताया गया है. इस बार मां देवी दुर्गा का आगमन गज पर हो रहा है. जो धन धान्‍य से युक्‍त करते हुए सुवृष्टि का योग बना रहा है. वहीं मां का गमन यानि प्रस्‍थान दशमी गुरुवार को नर वाहन पर होगा. जिसका फल जन सामान्‍य के शुभ और संपन्‍नता वाला होगा.


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महानिशा पूजन 29 सिंतबर को


पं भटट् बताते हैं कि इस बार सप्‍तमी तिथि सोमवार 29 सितंबर को पड़ रही है. जो दिन में 12.26 बजे तक ही है. इसके बाद अष्‍टमी तिथि लग जायेगी. इसलिए महानिशा पूजन व कलश स्‍थापन इसी दिन किया जाना श्रेयस्‍कर होगा. सोमवार को रात्रि 11.36 से 12.26 बजे तक महानिशा पूजन और कलश स्‍थापना का शुभ मुहुर्त है. वहीं अष्‍टमी का व्रत 30 सितंबर मंगलवार को रखा जायेगा.

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से डिजिटल होगी स्वास्थ्य सेवाएं, काशी में विशेषज्ञों ने साझा की कार्ययोजना
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से डिजिटल होगी स्वास्थ्य सेवाएं, काशी में विशेषज्ञों ने साझा की कार्ययोजना
वाराणसी : आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन एवं डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बुधवार को रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, सिगरा, वाराणसी में एबीडीएम कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य संस्थानों तथा निजी क्षेत्र के चिकित्सकों एवं अधिकारियों ने भाग लिया. कार्यक्रम में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश की सचिव रितु माहेश्वरी, साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा और मंडलायुक्त वाराणसी एस. राजलिंगम भी उपस्थित रहे. सचिव रितु माहेश्वरी ने अपने संबोधन में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत प्रदेश एवं जनपद स्तर पर हुई प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी. साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के बीच बेहतर डिजिटल समन्वय के संबंध में जानकारी दी.उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को एबीडीएम के डिजिटल सिस्टम के साथ समन्वित रूप से संचालित करने से लाभार्थियों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए सेवाओं की प्रक्रिया को अधिक सुगम और प्रभावी बनाया जा सकता है. उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग और आवश्यक प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दिया. मंडलायुक्त वाराणसी एस. राजलिंगम ने कहा कि कार्यशाला के दौरान एबीडीएम के संबंध में दी गई जानकारी को मंडल के स्वास्थ्य संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा. उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सभी संबंधित विभागों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई.कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन पी सिंह ने उपस्थित सभी अतिथियों, अधिकारियों और चिकित्सकों का स्वागत किया. उन्होंने एबीडीएम के प्रभावी क्रियान्वयन में स्वास्थ्य विभाग और संबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला. कार्यशाला का संचालन संयुक्त निदेशक डॉ. मोहित सिंह द्वारा किया गया. कार्यक्रम में तीनों मंडलों से आए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों, निजी मेडिकल कॉलेजों एवं निजी चिकित्सालयों के चिकित्सा अधीक्षकों सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिकित्सकों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने एबीडीएम के क्रियान्वयन, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, स्वास्थ्य रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और स्वास्थ्य संस्थानों में इसके उपयोग से संबंधित विषयों पर अपने विचार और अनुभव साझा किए.ALSO READ : सारनाथ में पुलिसिंग का रियलिटी चेक, विवेचना से साइबर सुरक्षा तक परखी तैयारीकार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी एवं निजी क्षेत्र के अधिक से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को एबीडीएम से जोड़कर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए, ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अधिक सुगम और व्यवस्थित तरीके से मिल सके. कार्यक्रम में नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सैगल, हेरिटेज मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक डॉ. सिद्धार्थ राय, आई एम ए अध्यक्ष डॉ. अनुराग टंडन और पंडित महामना कैंसर केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आकाश ने मंच साझा किया. कार्यक्रम के अंत में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक जिला महिला चिकित्सालय वाराणसी डॉ. मनीषा सिंह सेंगर ने कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अतिथियों और तीनों मंडलों के प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया. उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, अधिक से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को एबीडीएम से जोड़ने और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया. उनका कहना था कि एबीडीएम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक व्यवस्थित, सुगम और मरीज-केंद्रित बनाना है.
सारनाथ में पुलिसिंग का रियलिटी चेक, विवेचना से साइबर सुरक्षा तक परखी तैयारी
सारनाथ में पुलिसिंग का रियलिटी चेक, विवेचना से साइबर सुरक्षा तक परखी तैयारी
वाराणसी: पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने मंगलवार 22 सितंबर को थाना सारनाथ का निरीक्षण कर सर्किल सारनाथ के अंतर्गत आने वाले थानों की पुलिसिंग, लंबित एवं कालबाधित विवेचनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों को अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर पुलिसिंग और जनसुनवाई को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए. लंबित और कालबाधित विवेचनाओं की समीक्षा करते हुए प्रत्येक मामले में गुणवत्तापूर्ण साक्ष्य संकलन, प्रभावी पर्यवेक्षण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया.‘थाना गोद लेने’ की पहल के तहत संबंधित अधिकारियों को थानों की कार्यप्रणाली, अपराध नियंत्रण, जनसुनवाई और पुलिसकर्मियों के कल्याण की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए. निरीक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों से साइबर सुरक्षा, प्रतिबिम्ब एप, सीसीटीएनएस, आरटीसी, जेडएफडी, फॉरेंसिक जांच, साक्ष्य संकलन, सीडीआर और आईडीपीआर से जुड़े विषयों की जानकारी ली गई. पुलिस आयुक्त ने तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया.मिशन शक्ति केंद्र की महिला पुलिसकर्मियों को विद्यालयों, हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा महिलाओं और छात्राओं से संवाद बढ़ाने को कहा गया. इसके अलावा शिक्षण संस्थानों में सीसीटीवी कैमरों की नियमित जांच, महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई और 1090, 112 व 1930 हेल्पलाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए.रिक्रूट बने सवालों के ‘स्मार्ट’ जवाबपुलिस आयुक्त ने नए रिक्रूट आरक्षियों से साइबर अपराध, नए कानून, सीसीटीएनएस और फॉरेंसिक सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए. बेहतर प्रदर्शन करने वाले 6 रिक्रूट आरक्षियों को ₹500-₹500 का नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया. इनमें अनुप्रिया पटेल — थाना चोलापुर, पूनम देवी — थाना चौबेपुर, प्रियांशु दूबे — थाना चौबेपुर, रजत शाही — थाना सारनाथ, प्रियंका देवी — थाना सारनाथ और गार्गी सिंह — थाना सारनाथ शामिल हैं.पुलिस आयुक्त ने अधिकारियों और थाना प्रभारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने, जाम की स्थिति रोकने और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के निर्देश दिए. थाना परिसर में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, आगंतुकों के लिए बेहतर व्यवस्था, महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग शौचालय और पुलिस मेस में स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया. निरीक्षण के दौरान डीसीपी वरुणा जोन राजेश कुमार पाण्डेय, एडीसीपी वरुणा जोन लिपि नगायच सहित संबंधित एसीपी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे.
बीएचयू केंद्रीय कार्यालय का घेराव, चीफ प्रॉक्टर को हटाने की उठाई मांग, सुरक्षाकर्मियों से हुई धक्का मुक्की
बीएचयू केंद्रीय कार्यालय का घेराव, चीफ प्रॉक्टर को हटाने की उठाई मांग, सुरक्षाकर्मियों से हुई धक्का मुक्की
वाराणसी : बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ छात्र लामबंद हो गए हैं. इसी क्रम में बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया. छात्रों के केंद्रीय कार्यालय की ओर बढ़ने की सूचना पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम मौके पर पहुंच गई और छात्रों को रोकने का प्रयास किया. इस दौरान छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर को तत्काल पद से हटाने की मांग की. अपनी मांगों को लेकर परिसर में दीवार लेखन का भी सहारा लिया. हालांकि कई स्‍थानों पर लेखने को मिटाने का प्रयास भी किया गया.छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर छात्र संगठनों में नाराजगी है. आरोप है कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद उनके खिलाफ जांच कमेटियां गठित की जाती हैं और उन्हें कार्यालय बुलाकर पूछताछ के नाम पर मानसिक रूप से परेशान किया जाता है.छात्र पल्लव ने कहा कि चीफ प्रॉक्टर के निर्देश पर कई मामलों में छात्रों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाएं हुई हैं. उनका कहना है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने वाले छात्रों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है. इसी को लेकर एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रॉक्टोरियल व्यवस्था में तत्काल बदलाव की मांग की है.छात्रों ने रखीं नौ प्रमुख मांगें• चीफ प्रॉक्टर व प्रोक्टोरियल बोर्ड को तत्काल बर्खास्त किया जाए.• छात्रों पर दर्ज मुकदमे व दंडात्मक कार्रवाई वापस ली जाए.• छात्रों के उत्पीड़न व अभद्रता पर तत्काल रोक लगे.• 12 सितंबर की प्रेक्षागृह आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो.• विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगे.• संवेदनशील स्थानों पर CCTV व डार्क स्पॉट पर स्ट्रीट लाइट लगे.• मधुवन उद्यान सहित सार्वजनिक स्थलों की निगरानी बढ़े; नशाखोरी पर रोक लगे.• खाद्य दुकानों पर CCTV व अनिवार्य रेट लिस्ट हो.• सुरक्षाकर्मियों के वेतन-सेवा शर्तों में समानता व उत्पीड़न पर रोक सुनिश्चित हो.