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गंगा जल में हैं खतरनाक हाइड्रोकार्बन: बीएचयू का बड़ा खुलासा

गंगा जल में हैं खतरनाक हाइड्रोकार्बन: बीएचयू का बड़ा खुलासा
Sep 03, 2025, 10:26 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: गंगा नदी, जिसे भारत की जीवनदायिनी धारा कहा जाता है, अब गंभीर प्रदूषण संकट से जूझ रही है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर जितेंद्र पांडेय और शोध छात्रा नेहा नाज ने अपने दो साल के लंबे अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा किया है. उनका कहना है कि कानपुर से वाराणसी तक गंगा के जल, बालू और मछलियों में पालीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) की खतरनाक मात्रा मौजूद हैं.


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क्या है पालीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH)?


पीएएच जहरीले रसायन हैं, जो मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम, गैस), औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों के धुएं, जंगल की आग और शवदाह से उत्पन्न होते हैं. पहले ये अधिकतर वायु प्रदूषण में पाए जाते थे, लेकिन अब इनकी बड़ी मात्रा गंगा जल में पाई जा रही है.


शोध की प्रमुख बातें


नमूना स्थल : जाजमऊ (कानपुर-उन्नाव), मेहंदी घाट (कन्नौज), अदलपुरा (मिर्जापुर), मणिकर्णिका घाट (वाराणसी).

परीक्षण सामग्री : गंगा का पानी, नदी की बालू और रोहू मछली.

परीक्षण लैब : साफिस्टिकेटेड इंडस्ट्रियल मटेरियल लैब, नई दिल्ली.

मिले हुए रसायन : नैफ्थालीन, एसिनाफ्थालीन, फिनांथीन, फ्लूरांथीन, पायरीन, बेंजोएंथ्रासीन, बेंजोपायरीन और क्राइसीन.

मात्रा : पानी में 75 नैनोग्राम प्रति लीटर तक, बालू में 20 नैनोग्राम प्रति ग्राम से अधिक और रोहू मछली में 20 नैनोग्राम प्रति ग्राम से ज्यादा.


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स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर


हृदय रोग और अस्थमा की आशंका बढ़ती है.

गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा.

प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव.

आंख, त्वचा और श्वसन तंत्र को नुकसान.

गंगा का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित, जिससे मछलियों और जलीय जीवों की संख्या घटने का खतरा.


बचाव के उपाय


1. जीवाश्म ईंधन और भारी धातुओं का उपयोग नियंत्रित किया जाए.

2. नदियों का बहाव बढ़ाया जाए और प्रदूषण के स्रोतों को कम किया जाए.

3. शवदाह घाटों और औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए

4. प्लास्टिक, कीटनाशक और डाई इंडस्ट्री पर निगरानी रखी जाए.


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भविष्य के फायदे (यदि समय रहते कदम उठाए जाएं)


गंगा को पुनर्जीवित किया जा सकेगा.

प्रदूषण नियंत्रण से गंगा का जल फिर से पेय योग्य और मछली पालन के लिए सुरक्षित होगा.


स्वास्थ्य लाभ – हृदय रोग, अस्थमा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा घटेगा.

पर्यावरण संरक्षण – जलीय जीवन सुरक्षित रहेगा, जिससे जैव विविधता को बल मिलेगा.

आर्थिक लाभ – मछली उत्पादन बढ़ेगा और गंगा से जुड़े पर्यटन व धार्मिक कार्यों को नया जीवन मिलेगा.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण – यह शोध आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रदूषण नियंत्रण और नदी प्रबंधन की मजबूत नींव बनेगा.


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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व


यह शोध जर्मनी के प्रतिष्ठित जर्नल स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित हुआ है, जिससे गंगा की समस्या अब वैश्विक मंच पर भी चर्चा का विषय बन गई है. दुनिया की अन्य बड़ी नदियों जैसे अमेजन, मिसीसिपी, यांग्जी और येलो में भी यही समस्या देखी जा रही है. यह शोध एक चेतावनी भी है और अवसर भी. चेतावनी इसलिए कि गंगा का जल और उसमें पाई जाने वाली मछलियां अब सुरक्षित नहीं हैं. अवसर इसलिए कि यदि समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जाए, तो गंगा फिर से शुद्ध और जीवनदायिनी धारा बन सकती है.


मोदी के जन्मदिन पर 1076 बेटियों ने दी शुभकामना
मोदी के जन्मदिन पर 1076 बेटियों ने दी शुभकामना
वाराणसी: प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर बुधवार को परमानंदपुर मिनी स्टेडियम में खेल प्रतिभाओं का अनूठा संगम देखने को मिला. जन्मदिन समारोह में 1076राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बालिका खिलाड़ियों के साथ विकास इंटर कॉलेज, परमानंदपुर की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की. बड़ी संख्या में बेटियों की मौजूदगी से पूरा स्टेडियम उत्सव के रंग में रंगा नजर आया.कार्यक्रम के दौरान बालिका खिलाड़ियों और छात्राओं में खासा उत्साह रहा. खेल मैदान से लेकर समारोह स्थल तक बेटियों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया. कार्यक्रम के समापन पर बालिकाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशाल कटआउट के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और सेल्फी लेकर इस यादगार अवसर को कैमरे में कैद किया. इसके बाद एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जन्मदिन की खुशियां साझा कीं.कार्यक्रम के संयोजक हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष एवं विकास एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. एके सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में कई प्रयास हुए हैं. इससे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए नए अवसर मिले हैं और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिला है.उन्होंने कहा कि बेटियों की खेलों में बढ़ती भागीदारी देश के लिए सकारात्मक संकेत है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली खिलाड़ियों के साथ छात्राओं की सहभागिता से नई पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रेरणा मिलेगी.ALSO READ:रथयात्रा के बंद मकान में चल रहा था जुए का अड्डा, 47 लोग गिरफ्तारसमारोह में 1076 बालिका खिलाड़ियों की भागीदारी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही. खेल और युवा प्रतिभाओं को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम ने बेटियों की प्रतिभा, उत्साह और खेलों के प्रति उनके बढ़ते रुझान को सामने रखा.
रथयात्रा के बंद मकान में चल रहा था जुए का अड्डा, 47 लोग गिरफ्तार
रथयात्रा के बंद मकान में चल रहा था जुए का अड्डा, 47 लोग गिरफ्तार
वाराणसी: सिगरा थाना क्षेत्र के रथयात्रा इलाके में पुलिस और SOG-2 की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बंद मकान में चल रहे जुए के अड्डे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से 47 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 10 लाख रुपये नकद, कई वाहन, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किया गया है।डीसीपी क्राइम नीतू काद्यान की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रथयात्रा के पास एक मकान में बाहर से ताला लगाकर अंदर जुआ खेले जाने की सूचना पुलिस को मिल रही थी। इसके बाद टीम ने करीब तीन से चार दिन तक मकान की गतिविधियों पर नजर रखी। जब अंदर बड़ी संख्या में लोग जुटे तो SOG-2 और सिगरा पुलिस की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा। कार्रवाई के दौरान 47 लोगों को जुआ खेलते हुए पकड़ा गया।पुलिस की जांच में सामने आया कि विशाल सिंह नाम के व्यक्ति ने मकान को लीज पर लिया था। पुलिस के अनुसार, इसी मकान से जुए का संचालन किया जा रहा था। पकड़े गए लोगों में वाराणसी के साथ आसपास के जनपदों के लोग भी शामिल हैं।पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में संगठित अपराध समेत अन्य धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है।ALSO READ:आईएमएस के वार्षिक दिवस समारोह को लेकर बैठक, स्वास्थ्य मेले में एआई और आईआईटी की तकनीकी मदद लेने पर जोरडीसीपी क्राइम नीतू काद्यान ने बताया कि मामले में अभी जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मीडिया के सामने प्रस्तुत की जाएगी।
आईएमएस के वार्षिक दिवस समारोह को लेकर बैठक, स्वास्थ्य मेले में एआई और आईआईटी की तकनीकी मदद लेने पर जोर
आईएमएस के वार्षिक दिवस समारोह को लेकर बैठक, स्वास्थ्य मेले में एआई और आईआईटी की तकनीकी मदद लेने पर जोर
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) में आगामी वार्षिक दिवस समारोह को लेकर बुधवार को कमेटी की बैठक आयोजित की गई। आईएमएस कमेटी रूम में हुई बैठक की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. शंखवार ने की। बैठक में पिछले वर्ष के कार्यक्रम की समीक्षा के साथ इस वर्ष आयोजित होने वाले स्वास्थ्य मेले को और अधिक उपयोगी एवं जनसुलभ बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।कार्यक्रम समन्वयक प्रो. टी.पी. चतुर्वेदी ने पिछले वर्ष आयोजित कार्यक्रम की गतिविधियों और अनुभवों की समीक्षा प्रस्तुत की। इसके बाद इस वर्ष के स्वास्थ्य मेले के समन्वयक प्रो. वी.एन. मिश्रा के साथ जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारियों पर चर्चा हुई।स्वास्थ्य मेले में एआई और आईआईटी की तकनीकी मददप्रो. वी.एन. मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष महामना के उद्देश्यों के अनुरूप स्वास्थ्य मेले को और व्यापक बनाने के लिए चिकित्सा विज्ञान संस्थान के साथ आईआईटी-बीएचयू की तकनीकी विशेषज्ञता का सहयोग लिया जाएगा। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य तकनीकी संसाधनों का भी उपयोग किए जाने की योजना है।बैठक में निदेशक प्रो. एस.एन. शंखवार ने कहा कि स्वास्थ्य मेले के माध्यम से काशी की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था के साथ आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद और डेंटल चिकित्सा के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी उचित परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।कमेटी सदस्यों ने दिए सुझावबैठक में मेडिसिन संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता, आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. मूर्ति, डेंटल संकाय प्रमुख प्रो. अतुल भटनागर, प्रो. भुवाल राम और प्रो. एस.के. भारती समेत कमेटी के अन्य पदाधिकारियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।ALSO READ :लोहता में बुनकरों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर शुरू, विशेषज्ञ डॉक्टर देंगे परामर्श...इस अवसर पर प्रो. वी.एम. सिंह, वैद्य सुशील दुबे, डॉ. अखिलेश चन्द्र, डॉ. महेश, प्रो. संगीता, डॉ. नीरज त्रिपाठी, डॉ. संतोष सिंह और प्रो. अजय पांडे समेत अन्य कमेटी पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में स्वास्थ्य मेले को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और आम जनता के लिए उपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।