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काशी बनी देशी- विदेशी सैलानियों की पहली पसंद

काशी बनी देशी- विदेशी सैलानियों की पहली पसंद
Sep 09, 2025, 01:13 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: भारत के पर्यटन मानचित्र पर काशी का चमकता सितारा अब पहले से कहीं अधिक दमक रहा है. वहीं गोवा में बढ़ता क्राइम और पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और मौसम की मार से पर्यटक दूरी बना रहे हैं. ऐसे में वाराणसी का आध्यात्मिक आकर्षण, धार्मिक महत्व और लगातार बेहतर हो रही सुविधाओं ने इसे देश-विदेशी सैलानियों की सबसे पसंदीदा मंज़िल बना दिया है.


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2023 से 2024 तक जबरदस्त उछाल


पर्यटन विभाग के मुताबिक, वर्ष 2023 में काशी में 8.54 करोड़ देसी-विदेशी पर्यटक आए थे। वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या 11 करोड़ 9 लाख 77 हजार 743 तक पहुंच गई. यानी एक साल में करीब 2 करोड़ 46 लाख की बढ़ोतरी। आंकड़ों के अनुसार यह वृद्धि 18.73 प्रतिशत रही, जो देश में पर्यटन वृद्धि के लिहाज़ से रिकॉर्ड मानी जा रही है.



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महाकुंभ ने बढ़ाई काशी की रौनक


प्रयागराज महाकुंभ-2025 का सीधा असर वाराणसी पर भी पड़ा. जनवरी से मई 2025 तक ही 12 करोड़ 47 लाख 57 हजार 960 सैलानी यहां पहुंचे. इनमें भारतीय पर्यटकों की संख्या 12 करोड़ 45 लाख 74 हजार 62 रही और विदेशी पर्यटक 1 लाख 82 हजार 869 पहुंचे.

यह रफ्तार बताती है कि साल 2025 का कुल आंकड़ा 2024 से कहीं आगे निकल सकता है.


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महीने-दर-महीने बढ़ती रही सैलानियों की संख्या


जनवरी 2025 : 4.80 करोड़


फरवरी 2025 : 6.06 करोड़


मार्च 2025 : 60.9 लाख


अप्रैल 2025 : 51.3 लाख


मई 2025 : 48.5 लाख


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जून से अगस्त तक का आधिकारिक आंकड़ा भले विभाग के पास नहीं है, लेकिन खुफिया विभाग के अनुसार जून में 2395 और जुलाई में 4466 विदेशी पर्यटक काशी पहुंचे.


काशी को क्यों मिल रही प्राथमिकता?


पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार कई कारणों से सैलानियों का रुख बदल रहा है:


1. सुरक्षा की चिंता – पहाड़ों पर भूस्खलन, सड़क हादसे और गोवा में आपराधिक घटनाओं से पर्यटक बच रहे हैं.


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2. आध्यात्मिक शांति की तलाश – वैश्विक अस्थिरता और तनाव के दौर में लोग आस्था और अध्यात्म की ओर खिंच रहे हैं.



3. काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प – भव्य धाम परिसर के लोकार्पण ने काशी को अंतरराष्ट्रीय आकर्षण बना दिया है.



4. बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी – सड़क, रेल और हवाई मार्ग लगातार आधुनिक हो रहे हैं, जिससे देश-विदेश से पहुंचना आसान हुआ है.


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5. सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर – सारनाथ, गंगा आरती, घाटों पर क्रूज़ और नाव विहार जैसी गतिविधियों ने पर्यटकों का अनुभव और समृद्ध किया है.


बढ़ते पर्यटन से रोजगार और कारोबार में उछाल


पर्यटकों की बढ़ती आमद का सीधा असर वाराणसी की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवल एजेंसी, गाइड, नाविक, हस्तशिल्प और रेशम कारोबारियों को लगातार लाभ हो रहा है. स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं.


नई योजनाओं से और सजेगा पर्यटन


संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार के मुताबिक, “काशी में बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता है। जल्द ही काशी दर्शन बस सेवा शुरू की जाएगी. साथ ही कई नई योजनाएं भी तैयार हैं जो जल्दी ही धरातल पर दिखाई देंगी.”


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आने वाले महीनों की तस्वीर


सावन के बाद पर्यटकों का नया उभार : श्रावण मास में लाखों शिवभक्तों का आगमन होगा.


श्राद्ध पक्ष के बाद : परंपरागत रूप से बड़ी संख्या में पर्यटक घाटों और मंदिरों का रुख करते हैं.


त्योहारों का मौसम : दीपावली और देव दीपावली पर काशी की भव्यता देखने लायक होती है, जो विदेशी पर्यटकों को भी खास आकर्षित करती है.


गोवा और पहाड़ों से दूरी बनाकर पर्यटक अब वाराणसी को अपना रहे हैं। यहां की गंगा आरती, अध्यात्मिक वातावरण, सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक सुविधाओं का संगम इसे दुनिया के सबसे खास पर्यटन स्थलों में शामिल कर रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में काशी का नाम वैश्विक टॉप टूरिज्म डेस्टिनेशन में दर्ज होना तय है.

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र ने फांसी लगाकर दी जान, परिवार में पसरा मातम
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र ने फांसी लगाकर दी जान, परिवार में पसरा मातम
A student preparing for competitive exams committed suicide by hanging himself, leaving his family in mourning.वाराणसी: सारनाथ क्षेत्र में किराए पर रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र ने मंगलवार को फांसी लगाकर जान दे दी. सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. छात्र की पहचान गाजीपुर निवासी 20 वर्षीय विशाल यादव के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार आत्‍महत्‍या की वजह स्‍पष्‍ट नहीं हो सकी है. घटना से जुडे सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है. छात्र की मौसेरी बहन आकृति यादव ने बताया कि विशाल अपनी बड़ी बहन सरिता और उनके साथ सारनाथ थाना क्षेत्र की अटल नगर कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान में रहते थे. वे सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे.आकृति के अनुसार, उनके मौसा रमेश यादव दुबई में रहते हैं और विशाल गाजीपुर से स्‍नातक का छात्र था. आकृति ने बताया कि घटना वाले दिन वह सुबह मंदिर दर्शन के लिए गई थीं, जबकि विशाल की बड़ी बहन सरिता कोचिंग चली गई थी. दोपहर करीब 12:30 बजे जब आकृति मंदिर से लौटीं, तो विशाल के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. उन्होंने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने विशाल के मोबाइल पर कई बार कॉल किया, जो रिसीव नहीं हुई.डायल 112 को दी सूचना अनहोनी की आशंका होने पर आकृति ने खिड़की से झांक कर देखा तो विशाल के गले में स्टॉल से फंदा लगा था और वह बेड पर लटका हुआ था. यह देखते ही आकृति जोर से चीख पड़ीं. उसकी चीख-पुकार सुनकर मकान मालिक और अन्य किराएदार भी मौके पर आ गए. लोगों ने दरवाजा तोड़कर विशाल को फंदे से नीचे उतारा और अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं. इसके बाद परिजनों और डायल 112 को घटना की सूचना दी गई.यह भी पढ़ें: रोहनिया हाईवे पर फुट ओवरब्रिज निर्माण के चलते घंटों बाधित रहा यातायात, वाहनों की लगी कतारसारनाथ पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की. सारनाथ पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा.थाना प्रभारी सारनाथ पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आत्महत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है और कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है. मृतक के मोबाइल को फोरेंसिक टीम ने जांच के लिए कब्जे में ले लिया है. परिजनों द्वारा तहरीर दिए जाने पर आगे की कानूनी कार्यवाही की जाएगी.
रोहनिया हाईवे पर फुट ओवरब्रिज निर्माण के चलते घंटों बाधित रहा यातायात, वाहनों की लगी कतार
रोहनिया हाईवे पर फुट ओवरब्रिज निर्माण के चलते घंटों बाधित रहा यातायात, वाहनों की लगी कतार
वाराणसी: रोहनिया के मोहनसराय हाईवे स्थित चौराहे पर पैदल राहगीरों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे फुट ओवर ब्रिज के निर्माण कार्य के दौरान मंगलवार की सुबह यातायात लगभग दो घंटे तक पूरी तरह बाधित रहा. इस दौरान हाईवे और सर्विस रोड पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.रोका गया वाहनों का आवागमन निर्माण एजेंसी की टीम ने भोर से ही तैयारी शुरू कर दी थी. पहले से बगल की जमीन पर लोहे के गटर को दो भागों में वेल्डिंग करके तैयार किया गया था. सुबह करीब 5 बजे से 7 बजे तक चार क्रेन की मदद से इन भारी-भरकम गटरों को हाईवे के दोनों तरफ बने पिलरों पर सेट किया गया. क्रेन से सेटिंग का काम चलने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था. इस दौरान दोनों तरफ सैकड़ों वाहन खड़े हो गए और यातायात जाम की स्थिति बन गई. राहगीर पैदल चौराहा पार करने में भी दिक्कत महसूस कर रहे थे.लगभग दो घंटे की मेहनत के बाद सफलतापूर्वक गार्डर की सेटिंग पूरी होने के बाद सुबह 7 बजे यातायात को सुचारू रूप से बहाल कर दिया गया. इस फुट ओवर ब्रिज के बनने से मोहनसराय चौराहे पर पैदल यात्रियों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की सुविधा मिलेगी और दुर्घटनाओं की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाएगी.यह भी पढ़ें: BHU अस्‍पताल में जूनियर डाक्‍टरों की हड़ताल से तंग हुए मरीज, सीनियरों ने संभाला कामकाजस्थानीय लोगों ने निर्माण टीम की कुशलता की प्रशंसा की, लेकिन साथ ही यातायात बाधित होने के दौरान बेहतर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी की है ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी न हो. रोड पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
 BHU अस्पताल में  जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से तंग हुए मरीज, सीनियरों  से संभाला कामकाज
BHU अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से तंग हुए मरीज, सीनियरों से संभाला कामकाज
वाराणसी: बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में जूनियर डाक्‍टरों (जेआर1) की हड़ताल से कामकाज प्रभावित होने लगा है. जिससे मरीजों और तीतारदारों को इलाज में दुश्‍वारियों का सामना करना पड़ रहा है. जूनियर डाक्टरों ने अपनी हड़ताल का कारण एक महिला रेजिडेंट की आत्महत्या की कोशिश का विरोध बताया है. वहीं सीनियर रेजिडेंट ने मोर्चा संभाला लिया है. वहीं जूनियर डाक्‍टर अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं. धरने पर बैठे डा. अंबुज ने आरोप लगाया कि इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रशासन की ओर से संतोषजनक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक हड़ताल जारी रहेगी.आरोपित चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाईडाक्टरों की प्रमुख मांगों में जूनियर रेजिडेंट्स के लिए निश्चित ड्यूटी आवर तय करना, अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारु करना और महिला जूनियर डाक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपित चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है. इस बीच, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज प्रशासन का कहना है कि जांच समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. सर सुंदरलाल अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डाक्टरों की हड़ताल के कारण अस्पताल के करीब 28 वार्डों में तैनात लगभग 85 जूनियर रेजिडेंट्स ने कामकाज ठप कर दिया है, जिससे मरीजों को इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.धरना पर बैठा जूनियर रेजिडेंटों का समूह जूनियर रेजिडेंटों का एक समूह इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मुख्य द्वार पर धरना दे रहा है. उनका कहना है कि प्रशासन को मामले में की गई कार्रवाई को लेकर लिखित रूप से स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. डा. अंबुज ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे. वहीं इस मामले में आईएमएस निदेशक ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के लिए गठित कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.यह भी पढ़ें: BHU में अब चार वर्षीय B.Ed कोर्स, 12वीं के बाद शिक्षक बनने का सुनहरा मौकारिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस स्थिति के चलते मरीजों को इलाज में हो रही परेशानियों को देखते हुए प्रशासन को जल्द से जल्द समाधान निकालने की कोश‍िश कर रहा है. इस हड़ताल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को चुनौती दी है और मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है. हालांकि सीनियर डाक्‍टरों ने कामकाज संभाल रखा है.