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गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों नहीं करते? एक प्रेरणादायक पौराणिक प्रसंग

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों नहीं करते? एक प्रेरणादायक पौराणिक प्रसंग
Aug 27, 2025, 08:51 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की आज चतुर्थी को चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है. यह दिन "गणेश चतुर्थी" के रूप में भी प्रसिद्ध है. आज के दिन चंद्र देव का दर्शन कोई नहीं करता है . आइए जानते हैं कि क्यों आज के दिन दर्शन नहीं किया जाता है. गणेश पुराण में वर्णित एक अत्यंत रोचक और प्रेरणादायक प्रसंग है, जो हमें धैर्य, समता, न्याय और संयम का गूढ़ संदेश देता है.



पौराणिक मान्यता


चिरकाल पूर्व की बात है, जब महर्षि नारद भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत पर पहुँचे. उन्होंने भगवान शिव को एक दिव्य फल भेंट किया और कहा कि यह फल आप उसी को दें जो आपको सर्वाधिक प्रिय हो. यह सुनकर भगवान शिव एक धार्मिक संकट में पड़ गए, क्योंकि उस समय उनके दोनों पुत्र – भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश वहां उपस्थित थे और दोनों ही उस दिव्य फल को पाने की इच्छा रखते थे.



असमंजस में भगवान शिव


भगवान शिव असमंजस में पड़ गए कि किसे वह फल दें. उन्होंने सभी देवताओं को आमंत्रित किया और ब्रह्मा जी से सलाह ली. ब्रह्मा जी ने कहा कि चूंकि कार्तिकेय बड़े हैं, अतः फल उन्हें देना न्यायसंगत होगा.भगवान शिव ने निर्णय स्वीकारते हुए वह फल भगवान कार्तिकेय को प्रदान कर दिया.

यह देखकर भगवान गणेश खिन्न हो गए. उन्होंने निश्चय किया कि उन्हें यह निर्णय स्वीकार नहीं.सभा के समाप्त होते ही वे ब्रह्मा लोक पहुँचे और क्रोधित होकर ब्रह्मा जी के कार्यों में विघ्न डालने लगे. इस दृश्य को देखकर चंद्र देव (चंद्रमा) हँसने लगे, जो कि गणेश जी का उपहास था.



चंद्रदेव को दिया श्राप


भगवान गणेश ने यह अपमान सहन नहीं किया और चंद्र देव को श्राप दे दिया कि आज के बाद तुम किसी के देखने योग्य नहीं रहोगे. जो भी व्यक्ति तुम्हें देखेगा, वह पाप का भागी बनेगा.


इस श्राप के फलस्वरूप चंद्र देव का तेज नष्ट हो गया और वे लज्जित हो उठे. सभी देवता चिंतित हुए और भगवान गणेश की शरण में आए. कठिन तप और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने कहा.



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"मेरा वचन मिथ्या नहीं हो सकता, परंतु मैं यह श्राप एक दिन तक सीमित कर देता हूँ. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को जो कोई चंद्र दर्शन करेगा, वह दोष का भागी होगा. लेकिन अन्य चतुर्थियों पर चंद्र दर्शन आवश्यक रहेगा.


शिक्षा:


कभी भी अहंकार या उपहास न करें, विशेषकर किसी देवता या ज्ञानी व्यक्ति का.


न्याय में केवल बड़े-छोटे का विचार ही नहीं, बल्कि समर्पण, विवेक और निष्ठा का मूल्यांकन भी आवश्यक है.



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हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है – चाहे वह हँसी का मज़ाक हो या अन्याय का विरोध.


भगवान गणेश केवल बुद्धि के देवता ही नहीं, बल्कि न्यायप्रिय और दृढ़प्रतिज्ञ भी हैं.

प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने ने किया ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी का उद्घाटन
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वाराणसी : ललित कला काशी 'वर्थ एंड वरशिप' (Worth and Worship) प्रदर्शनी पेश कर रहा है।ललित कला काशी 15 से 17 जुलाई, 2026 तक वाराणसी के ऐतिहासिक घाटों पर "वर्थ एंड वरशिप" नाम की एक ओपन-स्पेस ग्रुप प्रदर्शनी आयोजित की गई है। डॉ. प्रियंका चंद्रा द्वारा क्यूरेट की गई इस अनोखी आउटडोर प्रदर्शनी में दस अवॉर्ड-प्राप्त कलाकार शामिल हैं: सिद्धार्थ, रामकुमार माहेश्वरी, आशिमा मेहरोत्रा, अनिल कुमार पटेल, स्वाति रंजन, दीपशिखा वर्मा, स्वाति झा, शालिनी सिंह, रितेक राज और सूरज वर्मा।इसका भव्य उद्घाटन आज 15 जुलाई को शाम 6 बजे सुबह-ए-बनारस घाट पर मुख्य अतिथि प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने की। इसके बाद यह प्रदर्शनी लोगों तक पहुँचने के लिए तुलसी, आदिनाथ, चेत सिंह और अस्सी घाटों पर जाएगी।ALSO READ: चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़पवित्र गंगा के किनारे, यह एग्ज़िबिशन दस आर्टिस्ट को दुनियावी लालच ("वर्थ") और भगवान की भक्ति ("वर्शिप") के बीच की पतली लाइन को समझने के लिए एक साथ लाती है, जो कुछ समय के लिए और हमेशा रहने वाले के बीच इंसानी संघर्ष को दिखाती है।
चाय की दुकान पर बिक रही थी अवैध शराब और बीयर, सिगरा पुलिस के छापे में भंडाफोड़
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वाराणसी: सिगरा थाना क्षेत्र के विजयनगरम मार्केट में संचालित एक चाय की दुकान पर अवैध रूप से शराब और बीयर की बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर सिगरा पुलिस ने छापेमारी कर दुकान से बड़ी मात्रा में शराब और बीयर बरामद की तथा अवैध कारोबार का भंडाफोड़ कर दिया।पुलिस के अनुसार, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि चाय की दुकान की आड़ में चोरी-छिपे शराब और बीयर बेची जा रही है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान दुकान से विभिन्न ब्रांड की शराब और बीयर की बोतलें बरामद हुईं।ALSO READ: बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथनपुलिस ने मौके से दुकान संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बरामद शराब और बीयर को जब्त कर लिया गया है। मामले में आबकारी अधिनियम समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।सिगरा पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बरेका में नराकास की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार पर मंथन
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वाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में बुधवार को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), वाराणसी की छमाही बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नराकास के अध्यक्ष एवं बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने की, जिसमें नगर के 60 से अधिक केंद्रीय कार्यालयों के प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचार और डिजिटल माध्यमों में इसके बढ़ते उपयोग पर व्यापक चर्चा की।बैठक में महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल कार्यालयी भाषा नहीं, बल्कि प्रशासन और आमजन के बीच संवाद का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने सदस्य कार्यालयों से हिंदी को सरल, प्रभावी और तकनीक-सम्मत बनाकर अधिकाधिक प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध कथन "निज भाषा उन्नति अहै" का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।इस दौरान नराकास, वाराणसी की पत्रिका 'बनारस दर्पण' तथा आईआईटी-बीएचयू की राजभाषा पत्रिका 'अभ्युदय' का लोकार्पण भी किया गया। बैठक में पिछली कार्यवृत्त की पुष्टि, निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा तथा विभिन्न सदस्य कार्यालयों की राजभाषा संबंधी प्रगति और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने अपने संस्थानों में हिंदी के प्रचार-प्रसार और नवाचारों से जुड़े अनुभव भी साझा किए।ALSO READ: पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह एक और मामले में बरी, 36 साल पुराने प्रकरण का पटाक्षेपपूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी के मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता जनता से उसके जुड़ाव पर निर्भर करती है और हिंदी इस जुड़ाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। वहीं गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के सहायक निदेशक (कार्यान्वयन) अजय कुमार चौधरी ने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी के बढ़ते उपयोग तथा सदस्य कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।बैठक में बरेका के उप महाप्रबंधक सागर, प्राचार्य प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र सुभाष चंद्र यादव सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नराकास के सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्डेय ने किया तथा अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।